1, मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाना।
2,जैव विविधता , पर्यावरण,जीवन के पांच महाभूतों का संरक्षण
3,मानव एवं मिट्टी के शवास्थ्य की ड़ेखभाल करते हुए खेती करना।
4 भविष्य की पीढ़ियों को ,शुद्ध खाना, शुद्ध हवा ,तथा शुद्ध पर्यावरण प्रदान करना।
5, हम प्रकृति के विरोध मैं जा रहे है।
6, रासायनिक खेती से उत्पादन्त बढ़ा परन्तु किस्नानों की आमदनी नहीं बड़ी।स्वास्थ्य,पर्यावरण जैव विविधतासित प्राकृति की व्यवस्था पर विपरीतप्रभाव पड़ा।
7 आर्थिक असंतुलन बढ़ा। बाजार पनपे हैं।
8,प्राकृति के साथ जुड़े रहें।
9,बीजों की परंपरा का ध्यान रखें।।
10,फैमिली फार्मर्स कंसेप्ट
11, कृषकों एवं उपभोक्ता परिवार के बीच संबंध।
12,पूरकता एवं उपयोगिता का सिद्धांत ।
13, इनपुट आधारित खेती नहीं करना है बल्कि समझ पर आधारित खेती करना है।
14,हमें मिट्टी को अवश्य छूनाचहिय। धरती अपनी खाद स्वयं बनती है।
15,गमला मै प्लांट लगाना भी एक प्रकृति खेती है।
16पूरकता,विविधता, उत्पादन का घनत्व ,Coexitence ,इकोलॉजिकल बैलेंस का सिध्दांत
17,भोजन मैं हवा पानी एवं ठोस
18 सहअस्तित्व का सिद्धांत।
19,आर्थिकसंकट।
20,
प्राकृतिक खेती देसी गाय, देसी बीजदेसी , देसी केचुआ एवं देसी पद्धतियों ,देसी गाय के मल मूत्र एवं गोबर पर आधारित इनपुट तथा देसी परंपराओं पर आधारित खेती करने का तरीका है जिसमें प्रकृति में चल रही स्वचालित,self organised, स्वयं सक्रिय self active,स्वयं पोशीself nourished, स्वयं विकासीय ,self developing,स्वयं नियोजित ,self planned,सहजीवी symbioticएवं आत्मनिर्भर self sustained ,,फसल उत्पादन रक्षा तथा फसल प्रबंधन व्यवस्था पर आधारित तरीकों को अध्ययन करके तथा उनसे संबंधित सभी विधियों फसल उत्पादन हेतु प्रयोग करके या अपना कर खेती की जाती है। इसमें रसायनिक विधियों को छोड़कर आईपीएम में प्रयोग की जाने वाली सभी विधियों को शामिल किया जा सकता है या किया जाता है।
21,