फसलों को जीवांश की जरूरत होती है। जीवांश विभिन्न पकार फसलों के अवशेषों तथा जीवों के मल मूत्र आदि को जमीन अथवा खेतों में डालने से जीवाणुओं ki क्रिया के द्वरा ह्यूमस केरूप में बनता है जो भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ात है। अतः भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए खेतों में जीवो का मल मत्र तथा फसलों के अवशेष आदि डालने चहिए ।
हमें प्राकृतिक खेती ही करनी चाहिए और रसायनों के उपयोग को खेती मैं बिल्कुल ही बंद करनाचहिए । क्योंकि रसायनऑन के अवशेष खाद्य श्रृंखला केद हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं और हमें बीमारियां देते हैं। इस प्रकार से रासायनिकद्वारा विषाक्त भोजन मिलता है। हमारे आगे आने वाली पीढियां को तो यह भी नसीब नहीं होगा क्योंकि रसायनों के उपयोग से जमीन मेंपाए जान वाले उपयोगी जवाणु जो हमस का निर्माण करते ह खत्म होने की कगार पर हैं ।
जमीन को जिंदा करदो इतना सा विज्ञान है प्राकृतिक खेती का । जमीन में जीवाणुओं की वापसी करनa ही प्राकृतिक खेती का तरीकa है।
फसल पारिस्थितिक तंत्रमैं जैव वविधता बढ़ाने के लिए खेतों की मेड़ों पर थोड़ी-थोड़ीद विभिन्न प्रकार के पेड़ लगाने चाहिए जिस पर चिड़िया अपना बेड का बना सके और वह खेतों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार k नाशिकीबों की संख्या क नियंत्रित कर सके।
0 खेतों के लेवल ka समतलीकरण करना चाहिए और उनके चारों तरफ चौड़ी मेड बनाना चहिएजिससे खेतों का जीवांश कार्बन दूसरेखेतों मैं बहकर न जा सके।
नशीजीबों के प्रबंधन ह विभिन्न प्रकार की विधियां जैसे परंपरागतविधिया, कल्चरल विधियां, मैकेनिकलवधियां, जेनेटिकली वधियां, तथा नासिजीव निगरानी एवं आकलन तथा फसल पारिस्थितिकतंत विश्लेषण करते हुए आवश्यक एवं उचित प्रकार का इटरवेंशनका करते हुए (सही नासि जीवों पर, सही नसी जीवनशकों का, सही समय पर, सहीमत्रा में, सही विधि द्वारा) उपयोग करते हुए सिर्फ किसी विशेष आपातकालीन स्थिति के निदान हेतु प्रयोग करते हुए फसल पारिस्थितिकतत्र में नशीजीवों की संख्या ko आर्थिक हानी स्टार के नीचे रखकरनाशी जीवों की समस्याओं से जब छुटकारा प्राप्त कियाजता है तब हम उसे एकीकृत नासिक प्रबंधन कहते हैं। एकीकृत नाशिजीव प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य कम से कम खर्चे में तथा रसायनोंका कम से कम उपयोग करते हुए तथा प्रकृति जीवन और समाज को कम से काम बाधित करतेहुए खाने के योग सुरक्षित तथा व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों ka उत्पादन करके सुरक्षित भोजन केसा खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित करना तथा कृषि उत्पादों का अधिक से अधिक विक्रय मूल्य प्राप्त करना है।