Thursday, April 2, 2026

इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट(आई पी एम)

          इंटीग्रेटेड पेस्ट मनेजमेंट (आई पी एम)
आईपीएम, नासि जीव प्रबंधन सहित संपूर्ण कृषि तंत्र अथवा पद्धति के समेकित प्रबंधन की एक विचारधारा है जिसमें नाशीजीव प्रबंधन एवं संपूर्ण कृषि तत्र के  सुचारूरऊप से क्रियान्वयन करनेकी सभी विधियों को समेकित रूप से प्रयोग करके फसल पारिस्थितिक तंत्र मैं पाए जाने वाले सभी नशीजीवों  की संख्या को आर्थिक हानी स्टार के नीचे सीमित रखते हुए खाने योग्य सुरक्षित तथा व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों का इस प्रकार सेउत्पादन किया जाता है कि कृषि उत्पादों का अधिकतम से अधिक तम विक्रय मूल्य प्राप्त हो सके तथा साथ साथ जमीन की उर्वरा शक्ति, सामुदायिक स्वास्थ्य, फसल पारिस्थितिक तंत्र,पर्यावरण, जैव विविधता , जीवन एवं जीवन के पंचमहाभूत क्षिति , जल पावक,गगन, समीरा तथा प्रकृति और उसके संसाधनों एवं  कृषकों  की आमदनी पर विपरीत प्रभाव ना पड़े तथा प्रकृति एवं समाज के बीच सामंजस्य स्थापित  हो सके। आईपीएम के क्रियान्वयन में रसायनों का उपयोग अंतिम विकल्प के रूप में किसी भी आपातकालीन स्थिति के निदान हेतुCIB &RC के द्वारा प्रदान  की गई संस्तुति के अनुसार किया जाता है।
         प्राकृतिक खेती आईपीएम का ही एक सुधरा हुआ रूप है जिसमें रसायनों का प्रयोग बिल्कुल ही नहीं  कियाजाता है तथा जमीन की उर्वरा शक्ति, जैव विविधता, जीवन के पंच महाभूत क्षिति,जल, पावक गगन समीरा तथा प्रकृति और उसके संसाधनों, वर्षा जल के संरक्षण,को भी महत्व दिया  जाता है ।
      आईपीएम तथा प्राकृतिक खेती का मुख्य उद्देश्य खाने के योग्य सुरक्षित भोजन के साथ खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा, एवं इकोलॉजिकल सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए जीडीपी पर आधारित विकास के साथ-साथ इकोलॉजिकल , इकोनॉमिकल, प्राकृतिक एवं सामाजिक विकास को महत्व दिया जाता है।
         खेती कोई भी हो वह प्रकृति और उसकी व्यवस्था के द्वारा संचालित होती है अथवा क्रियान्वित की जाती  है प्रकृति  को ही भगवान  कहा जाता हैं जिसका मतलब  होता है भू अर्थात जमीन, गगन अर्थात आकाश ,वायु  , अग्नि,नीर अर्थात पानी । जीवन के इन्हीं पंचमहाभूतों का सरक्षण करनेसे खेती के लिय बहुत जरूरी है ।

Wednesday, April 1, 2026

Production in Agriculture (From Green Revolution to Ever Green Revolution ,from food security to food and ecological safety,and from food quantity to food quality and Nutritional food.)

1,Production by masses not mass production. By Dr M S Swaminathan.
2, Production cost plus 50 %. MSP. Farmula by Dr MS Swaminathan
3,Sale price of Agri produce must  be fixed by the farmers not by the   Govt.
4, Agriculture is not respectable job.
,From cip to mouth.to right to food  stage.
5,We do not bargin in  in malls but we bargin with  the  farmers .
6, Enormous use of fertilizers to illogical use of water.
7 From Green Revolution to ever Green    Rrvolution.Sustainable Agriculture .
Wheat and Rice have become Commercial crops  due to Green Revolution. 
8, Refarming the policies  related with  Agriculture.
9,Nutrition intensive Agriculture.
10,Bengal Famine from 1942 to 19 46.Nearly 40 lakh people died  due to starvation.
10,We became  exporter of wheat and rice from importer quickly hence achieved Green Revolution. Our need was calory which got from wheat and Rice 
11, Are  we  producing nutritional  food? No.
    Nutritional value of our food was reduced.Nutrition is separated from Agriculture.We enhanced the production of food grains  but not the nutritive value.
12,We should maintain soil wth organic carbon and nutrition.We need to go towards Nutrition dense Agriculture for which we need to make farmers centric policies.
13,After ten years the quality of food will remain  suitable to eat or not.
14.Our stomach is filled that is why we are talking .
15 Green Revolution has played both positive as well as negative roles.It has enhance the tendency of illlihitimate use of inputs.storing of things eventhey are not needed.Green Revolution has enhanced the inhuman tendency or nature of man.Monopolization of technology is bad.
16 Wellfare of all must be our moto.



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8,

Saturday, March 28, 2026

इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आई पी एम) विचारधारा में बदलाव

प्रारंभिक तौर पर इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट अर्थात आईपीएम की  शुरुआत आईपीएम फॉर बेटर एनवायरनमेंट अर्थात उत्तम पर्यावरण हेतु आईपीएम अपनाये के नारे के साथ हुई थी ( 1991 ,-1992,,)तथा आईपीएम की की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 22 राज्यों में 26 केंद्रीय एकीकृत नासिक जीव प्रबंधन केंद्र स्थापित किए गए जिनकी संख्या बादमें 35 हो गई और अब यह संख्या 11 लोकस्ट वार्निंग आर्गेनाइजेशन के केंटो को मिलाकर तथा दो नए के दो कई मिलकर 48 हो गई है । आईपीएम में आईपीएम में सामुदायिक स्वास्थ्य, इकोसिस्टम, पर्यावरण, जैव,विधता, जीवन और उसके पंच महाभूत क्षिति, जल , पावक, गगन, समीरा तथा प्रकृति और उसके ससाधनों, समाज और उससे जुड़े हुए विभिन्न मद्दों, तथा खेती के क्रियान्वयन हेतु प्रयोग किए जानेवाले विभिन्न प्रकार की विचारधाराओं एवं रसायन रहित खाने योग्य सुरक्षित कृषि उत्पादों के उत्पादन की सपूर्ण पद्धति, उनका वैल्यूएडशन, गुणवत्ता नियंत्रण, सर्टिफिकेशन, लाइसेंसिंग,पैकेजिंग, विपणन एवं व्यापार, कॉस्ट बेनिफिट 
Ratio, खाद्य, पोषण,स्वास्थ्य तथा पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी हुई विभिन्न सुरक्षाओं, समस्याओं एवं मुद्दों को भी शमिल किया गया। इसके अतिरिक्त कृषकों की आमदनी, आदिसे जुड़े हुए मुद्दों को भी शामिल कर लिया गया। कृषि अथवा खेती का मुख्यउद्देश्य  सर्वे भवंतु सुखना सर्वेसतु निरामया है  अर्थात सभी प्राणी सुखी हों एवं निरोगी हो। इसके साथ-साथ खेती की विभिन्न प्रकार  की प्रणालीयों को  प्रकृति की व्यवस्था से जोड़ कर प्राकृतिक खेती के रूप में परिवर्तित कर दिया गया । यद्यपि 1993 के दरान इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट को प्राकृतिक फसल सुरक्षा के नाम मैं बदल दिया गया था जो बाद फिर से आईपीएम के नाम से जाना जाने लगा। 

Thursday, March 26, 2026

रासायनिक खेती के दुष्परिणाम

1, फसल उत्पादन लागत का बढ़ जाना। 
2, उत्पादन लगभग स्थिर हो गया ।
3, गांव के युवा बे रोजगार घूम रहे हैं ।
4, किसान कर्जदार हो  गया ।
5, जमीन में जीवांशकर्बन लगभग 0,3 प्रतिशत रह गया है जिस जमीन की उर्वरा शक्ति घट गई । यह कार्बन करीब एक प्रतिशत। होना चाहिए़ ।
6, बायोडायवर्सिटी नष्ट ह गई। बहुत सारेजव जंतु विलुप्त हो गए ।
7, भोजन स्तर नीचे चला गया ।
8, किसने की आत्महत्या बढ़ गई ।
9, भोजन, पानी, सब्जियां तथा फल, पशुओं का चारा तथा दूध आदिवो सीसी हो गए । जिनवा कीटनाशकों के अवशेष मिलने लगे ।
10, जलाशय खत्म हो गई।
11, भूमि की संरचना खराब हो गई । जमीन बंजर हो गई। 
12, मनो क्रॉपिंग से भोजन सिर्फ 6 फसलों तक ही सीमित रह गया यह फसल है गहूं
 चावल मक्का और गन्ना1
13 भोजन की पौष्टिकता खत्म हो गई ।
14 जल ,जमीन ,जंगल, जानवर, एवं जन सभी प्रभावित हुए ।
15, विभिन्नपकार की बीमारियां मनुष्य तथा जानवरों म
आनेलगीं ।
16, मनुष्य महार्मोंस डिसऑर्डर  के प्रभाव दिखाईद।
ने लगे ।
17,ज्यादा  उत्पादन के बावजूद फसल उत्पादों का विक्रय मूल्य काम मिल रहाह  ।
18,  1 किलो गेहूं से 900ग्राम दलिय गेहूं की कपनियां अथवा व्यापारी सुखी उनकी हैं उनकी आमदनी किसानों से अधिकह जब की किसान गेहूं के एक दाने से 1 किलो अनाज पैदा करता है। और वह कर्जदार  है और उसे कैबरा आत्महत्या करना पड़ता है  ।
19। क्लाइमेट चेंज अथवा मौसा म मै  बदलाव , तप क्रम में बढ़ोतरी, सुखआ  तथा बाढ़ की समस्या ।
20 नए-नए कीड़े तथा बीमारियों का प्रकोप। 
21, कीटों में नासि जीव नाशकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता का विकसित होना। 
22 विभिन्न राशि जीव अश्कों की संख्या में अचानक वृद्धि हो जना । लाभदायक जीवन की संख्या में कमी आ जाना ।
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