Sunday, May 31, 2026

विभिन्न प्रकार की खेती की पद्धतियां

          विभिन्न प्रकार की खेती की पद्धतियां
1,Traditional Farming. पारंपरिक खेती:-
यह एक प्रकार की कृषिपदति है जो सदियों से चली आ रही है जब हमारे देश के पास सिंचाई के साधन रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक, हाइब्रिड सीड्स,, तथा आधुनिक कृषि यंत्र नहीं होते थे तथा खेती पूर्ण रूप से मानव श्रम, पशु शक्ति, प्राकृतिक वर्षा, तथा पशुओं के मल मूत्र पर आधारित उर्वरक उर्वरकों, आदि पर आधारित होती  थी। इसमें देसी बीज प्रयोग किए जाते  थे । यह खेती परिवार के सदस्यों के द्वारा तथा पुराने तरीके के कृषि  यंत्रों का प्रयोग कर के  की जाती थी । इस प्रकार की खेती में जमीन के अंदर जीवाश्म कार्बन भरपूरमत्रा में होता था । इस प्रकार की खेती मैं स्थानीय बीजों  का प्रयोग किया जाता था। यह खेतीजीवन निर्वाह  के लिए की जाती थी। जो पूर्ण रूप से वर्षा परआधरित होती थी।
2,रासायनिक खेती:-यह कृषि की एक ऐसी पद्धति है जिसमें फसलों की पैदावार तेजी से  बढ़ाने के लिए तथा उन्हें कीटों आदि से बचाने के लिया कृतिम रसायनों ,रासायनिक उर्वरको,कीटनाशकों ,तथा खरपतवार नाशकों का भारी मात्रा में उपयोग कियाजत है।
3,एकीकृत नाशिजीव प्रबंधन पर प्राधारित खेती:-
इस प्रकार की खेती मैं कम से कम खर्चे में, फसल उत्पादन एवं नासि जीव प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, ऑर्गेनिक खेती,  इकोफार्मिंग , तथा परमा कल्चर आदि की विभिन्न  विधियों  एवं गतिविधियों को समेकित रूप से प्रयोग करके  फसल पारिस्थितिक तंत्र में पाए जानेवाले नाशिजीवों की संख्या को आर्थिक हानी स्टार के नीचे सीमित रखा जाता है। इस प्रकार की खेती मैं  रसायनों  का उपयोग सिर्फ किसी आपातकाल स्थिति के निपटान हेतु अंतिम विकल्प के रूप मैं इस प्रकार से किया जाता है कि जीवन, प्रकृति ,पर्यावरण, और समाज के क्रियाकलाप बाधित ना हो और गुणवत्तायुक्त  कृषि उत्पादों का भरपूर उत्पादन के साथ अधिक से अधिक विक्रय मूल्य प्राप्त हो सके।
4 जैविक  खेती  अथवा ऑर्गेनिक खेती:- बिना रसायनों के की जानेवाली खेती को ऑर्गेनिक खेती कहते हैं।इसप्रकारकी  खेती में जैविक उर्वरक,जैविक कीटनाशक,जैविक खाद  जैसे हरी खाद   केंचुआ खाद ,या तो घर पर बनाकर या बाजार से खरीदकर प्रयोग की जाती है।इस प्रकार की खेती में रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता है।इसमें भी स्थानीय इनपुट का प्रयोग किया जाता है। इस खेती मैं जेनेटिकली मोडिफाइड सीड्स का भी प्रयोग नहीं किया जाता है।
5,Biodynemic kheti :खेत को जिंदसमझा जाएगा,स्वस्थ मृदा उत्पन्न करें,मानवता का पोषण करे ,प्रकृति के बहाव मैं चलती है,नक्षत्रों की गति पर चलती है।
6,नेचुरल फार्मिंग:पराकृतिक खेती 
     Local ecosystem ke tahad sabhi components  shamil karein .
Tree,crops,animals biodiversity,ko samil karte huy kheti karain,No tillage.
Natural farming is an improved version of IPM in which no chemical is used and farming is done by improving the fertility of soil, conserving Natural resources and conserving Natural resources and Panch mahabhootas of life.
7,Ecofarming :-  Treat the  soilnot the plant.Enhance the population of microorganisms.It is the combination of modern and traditional practices /approaches.
8,Permaculture:- It is also Traditional and modern approach.
9,Zero budget Naturally Farming:- By Subhash Paaleker.
, किसी भी इनपुट की कीमत नहीं लगानी है । सभी इनपुट्स  को किसानों के खेतों पर ही तैयार करना है। छोटे किसानों के लिय यह सबसे अच्छी खेती है। इसमें कोई भी रसायन तथा GMOS प्रयोग नहीं किए जाते हैं। बीज और खाद घर पर ही बनाएं जाते हैं।


Friday, May 29, 2026

Themes of different types of Agricultural System.

 Themes of different types of Agricultural System.
1. खाने योग्य सुरक्षित तथा व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन।
Production of  safe food to eat and quality Agricultural products to trade.
2, खाने योग्य सुरक्षित भोजन के साथ साथ खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना।
To ensure food security along with food 
safety.
3, पारिस्थितिकतत्र एवं कृषि को साथ साथ लाएं।
 Bring Ecology and Agticulture together 
4, प्रकृति और उसके संसाधनों तथा जीवन और उसके पांच महाभूतों  की सुरक्षा एवं संरक्षण करें। 
Let's conserve and protect  the nature and it's resources and Five elements of life..
5, खेती को धीरे-धीरे रसायन रहित लाभकारी एवं किफायती बनायें।
   Let's make Agriculture Chemical less, economicnl land profitabl. , slowly slowly ..
6, जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं। 
   Let's enhance fertilityof soil.
7, विकास को विनाशकारी ना बनाया जाए। 
Let's not make development. Catestrpic in nature.
8, आईपीएम एक प्रकार का जैव पारिस्थितिक एवं किफायती  अप्रोच है।IPM is a bioecological,and ecomic approach of pestmsnagement.
8 आईपीएम तथा अन्य किसी भी प्रकार की कोई भी कृषि की वचारधारा  की देखभाल जमीन के नीचे से प्रारंभ करनी चाहिए ना की फसल से। 
Let's start care of farming from basement of soil not from above the ground or plants.
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Elements of Permaculture

Elements of Permaculture
1,Observe and interact.
2,Do not create wastes
3,Design the field.
4,Biofencing  like Bamboo fencing./Border fencing.
5,Farm house  with water sources.
6, Different zones of crops ,
7,Do not go to the market for puchaseng the inputs.Make inputs  and seeds at field itselves.
8 Multicropping  or  Joint  Family.
9, Water  and soil conservation.,
10,To enhance caor on contents in Soill
11,Farming as an Agribusiness and farmers as Enreprenure.
12.Cattles as a component of Farming.
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Sunday, May 24, 2026

प्राकृतिक खेती और परमा कल्चर

         प्राकृतिक खेती और परमा कल्चर 
जैसा कि मैने पहले यह बताया था कि प्राकृतिक  खेती आईपीएम का ही एक सुधरा हुआ रूप है जिसमें रसायनों का उपयोग बिलकुल  ही नहीं किया जाता है तथा भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के प्रयासो के साथ जैवविविधता,प्रकृति के  संसाधनों तथा जीवन के पंच महाभूतों  क्षिति,जल, पावक( अग्नि),गगन(स्काई) समीरा(वायु) का  सरक्षण  तथा कृषकों की आमदनी अथवा आय को बढ़ाने का भी प्रयाश किया जाता है तथा जल,जमीन ,जंगल,जानवर ,जन ,तथा  जमीन मै पाये जानेवाले,माइक्रूर्गनिज्म्स एवं जीवांश कार्बन तथा ह्यूमस का संरक्षण एवं रक्षा की जाती है। इसके लिए खेतों के चारों तरफ चौड़ी चोंडी मेड तथा मैंड प र र्पेड लगाए जातेहै एवं खेतों का समतलीकरण किया जाता है जिससे खेती के लिए आवश्यक तत्व  बहकर दूसरे खेत मैं ना जाने पाए , खेतों मैं जीवाश्म कार्बन, बढ़ाने हेतु जानवरों के मलमूत्र तथा खेतों मैं पाय जाने वाले खरपतवारों एवं  फसलें के 
 अवशेषों का र्खेतों  ही आच्छादन  किया जाता है। जिससे जमीन की  नमी एवं उर्वरा शक्ति बढ़ती  है । इसी प्रकार से  खेतों में सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाने हेतु जीवामृत  का प्रयोग किया जाता हैऔर नशीजीवों के नियंत्रण हेतु जन्तुओं तथा वनस्पतियों पर आधारित नशीनीव नाशकों  का प्रयोग किया जाता है।
ठीक इसी प्रकार से    पर्माकल्चर भी प्राकृतिक खेती का एक सुधारा हुआ रूप है। शब्द  परमआ कल्चर परमानेंट और एग्रीकल्चर के साथ संधी से मिलकर बना है।  खेती  की इस  विचारधारा में भी रसायनों का उपयोग बिल्कुल ही नहीं किया जाता है। यह एक प्रकार की प्रकृति पर आधारित खेती की एक आत्म निर्भर  तकनीक है  जिसमें बाहर से खाद  तथा  कीटनाशक  डाले बिना  जगल के पारिस्थितिक  तंत्र  पर आधारित इकोसिस्टम  की नकल करके इस प्रकार से खेती की जाती है जिससे पर्यावरण,जैवविविधता,प्राकृतिक
संसाधनों  तथा समाज को कोई नुकसान न हो।यह मानव की जरूरतें  जैसे भोजन ,पानी आवाश  आदि की पूर्ति करने  की  एक कृषि एवं जीवन शैली  प्रणाली है।पर्माकल्चर इस नोट अ रॉकेट साइंस बुत न  ईट इस  अ सब्जेक्ट ऑफ कॉमन सेंस।
Sustainable Agriculture, अथवा सतत कृषि का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचा बिना फसलों का उत्पादन करना है। वही पर्माकल्चर समग्र(हॉलिस्टिक) डिजाइन विज्ञान है जो केवल  खेती तक ही सीमित नहीं है बल्कि इससे मनुष्य और प्रकृति के बीच  सामाजज्स्य एक आत्म निर्भर जीवन शैली का निर्माण किया जाता है।
सस्टेनेबल एग्रीकल्चर अथवा टिकाऊ खेती का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संवर्धन, और किसानों की आर्थिक लाभप्रदता के बीच  संतुलन बनाए रखना है। टिकाखेती अथवा सस्टेनेबलएग्क मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक लाभ और सामाजिक समानता पर टिकी है।
Petmaculture एंड आईपीएम दोनों ही टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियांहै । मुख्य अंतर यह है की पर्माकल्चर एक  संपूर्ण कृषि और जीवन शैली  डिजाइन प्रणाली है जो प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर एक आत्मनिर्भर इकोसिस्टम बनाती है। जबकि आईपीएम एक विशेष रणनीति है जिसका उपयोग विशिष्ट तौर पर नशीजीवों  के नियंत्रण अथवा प्रबंधन  करने  और उसके  नुकसान  को कम करने हेतु किया जाता है।
परमा कल्चर 
1, एक आत्मनिर्भर इकोसिस्टम बनाना जो स्वयं अपना पोषण करें जिसमें कोई कचरा या वेस्ट ना हो। 
2, दृष्टिकोण-यह कृषि से कहीं आगे बढ़कर आवास निर्माण, ऊर्जासरक्षण, जल प्रबंधन एवं संरक्षण, और समाज को आपस में जोड़ने पर ध्यान  केंद्रित करती है।
3,कार्य प्रणाली -इसमें कई फसलों को एक साथ मिलकरमश्रित खेती की जाती है जिससे प्राकृतिक विविधता बनी रहे और यह पेस्टिसाइड एवं अन्य  रसायनो का पूर्ण रूपेण  बहिष्कार करता है।
परमा कल्चर  का मुख्य उद्देश्य क्षतिग्रस्त हुए फसल पारिस्थितिक तंत्र का पुनर्स्थापना करते हुए इसकी सक्रियता को बरकरार रखना, कृषकों की आमदनी को बढ़ाना, कृषि उत्पादों के उपभोक्ताओ के बीच कृषि रसायनों के दुष्परिणाम की जानकारी एवं जागरूकता पैदा करना, है।
Three Ethics of Perma culture परमा कल्चर की तीन नैतिकताएं ;-
1Earth care पृथ्वी की देखभाल;-जमीन की उर्वरा शक्ति,को जीवांश कार्बन, सूक्ष्मजीवों  पशुओं के दरा उत्सर्जितमल अथवा वेस्ट पदार्थों, खेतों में पाए जाने वले खरपतवारों, फसलों के अवशेषों को खेतों मेंडलकर खेतोंमे जीवांश कार्बन के मात्रा डालते हैं । सूक्ष्मजीवों की संख्या को बढ़ाने के लिये जीवामृत,एवं घनजीवमृत,को खेतों डालना चाहिये।खेतों के कारण तरफ मेड बनाना चाहिए तथा मीडो पर थोड़ी-थोड़ी दूर पर वृक्षलगाने चाहिए। इस प्रकार देजमो की देखभाल का सकती है। 
2 People care,,:-मनुष्यों की दखभाल :-
 ग्रौसेफ़ फूड to eat ,and quality agricultural commodities to trade . Grow chemical
residue free Agricultural commodities  supported by test reports.
3,Fair share:- भावी पीढ़ियों के लिए उर्वरा शक्ति से भरपूर जमीन,खाने योग्य सुरक्षित रसायन अवशेषों मुक्त  भोजन,पीने लायक सuद्ध जल ,सांस लेने के लिए शुद्ध वायु, अच्छा क्लाइमेट एवं पर्यावरण, स्वस्थ एवं निरोगी समाज, सक्रिय एवं भरपूर जैव विविधता युक्त फसल पारिस्थितिक तंत्र,उत्तम गुणवत्ता वाले बीज, छोड़कर जाना आज की परम आवश्यकता है। इसके लिय किसानों तथा उपभोगताओं  में रसायनों के दुष्परिणामां के बारे में एक जागरूकता  फैलाई जाए। किसानो को चहीय की वे गुणवत्तायुक्त   कृषि उत्पादों का उत्पादन करें।
परमाकल्चर मैं एकल फसल उत्पादन प्रणाली के स्थान पर बहुफसलीय प्रणाली को बढ़ावा दिया जाता है।तथा रसायनों के दुष्परिणामों के बारे मैं जागरूक करते हुए ग्राहकों को सीधे  गुणवत्तायुक्त कृषि उत्पादों को बेचा जाए तथा किसानो की आय को बढ़ाने का प्रयास किया जाए तथा किसानो की कृषि उत्पादों की उत्पादन लागत कम करके खेती को किफायती बनाने का प्रयत्न किया जाए।इसके लिय रसायनिक इनपुट्स के स्थान पर रसायन  रहित  प्राकृतिक खेती के इनपुट्स को किसानों के घर पर ही बनाने का प्रयास किया जाए।जमीन के अंदर पॉयजन वाले  हेविमेटल्स के अवशेषों को  दूर करने के लिए पत्तेदार वेजिटेबल्स की कम से कम लगातार तीन फ़सलों का उत्पादन किया जाना चाहिए ।
खाने की चीजों को इंटरनेट से
 डाउनलोड नहीं किया जा सकता है अतः इनका उगना ही उत्तम होगा ।
क्षतिग्रस्त हुए पारिस्थितिक तंत्र का पुनर्स्थापना करें ।
प्राकृतिक खेती एव  परमा कल्चर के क्रियान्वयन हेतु एकोलॉजिकल इंजीनियरिंग campanion crops trap
Crops,Border crops,,Biopesticides,Biocontrol agents,इंटर क्रॉप्स, ,Seeds  का प्रयोग करे।
फसल उत्पादों के स्टोरेज,ट्रांसपोर्ट्सपोर्ट,एक्स्पोर्ट के दौरान उचित नियंत्रण एवं रसायन रहित विधियों   का इस्तेमाल करें।
पर्माकल्चर के क्रियान्वयन हेतु फैमिली डॉक्टर के स्थान पर फैमिली फर्मर
 के कांसेप्ट को लागू करें और किसानों से एक प्रकार का बातचीत का एग्रीमेंट के अनुसार जिसमें0 कृषि उत्पादों की गुणवत्ता किसानों को बरकरार रखते हुए बाजार भाव से ज्यादा भाव देकर चीज खरीदी जा सकती हैं और उपभोक्ताओं में इस बात की भी जागरूकता होनी चाहिए कि बिना सीजन वाली सब्जियां फलों फल आदि को ना खरीदें।
गांव में रोजगार के अवसर बढ़ने  पड़ें गे जिससेगांव से--नवयुवकों का पलायन शहरों के लिए रोका जा सके। कृषि उत्पादों का सर्टिफिकेशन ,प्रोसेसिंग तथा उनका विपदान न आदि को  भी बढ़ावा दिया जा सके।