Friday, September 11, 2026

Lets redefine Integrated Pest Management (IPM)

Lets redefine IPM as an integrated approach and concept for the management of complete Agricultural System from sowing of crops to end use of crop produce including pest management.ie.to suppress the pest population below Economic threshold level(ETL)and also to sustain ecosystem and natural resources including five elements of life i.e.Earth,water,Agni (Solar system),Sky (Gagan)and Air.(Vayu)to ensure their availability for use of present and future generations(Permaculture )to ensure  food security along with food  safety and also to enhance the farmers income by reducing the cost of cultivation of agricultural commodities and expecting their  enhanced sale price is called as IPM.
                                            RAM ASRE
Additional Plant Protection Adviser-IPM
                                                                             

Thursday, August 6, 2026

खेती का सच

      खेती  का सच,:-Agronomy :-भूमि एवं फसलों का ऐसा प्रबंधन जिसमें कृषकों के परिवार की हर जरूरत पूरी हो जए और भूमि की उर्वरता पर कोई  विपरीत्व प्रभाव न पड़े एग्रोनॉमी अथवा सस्य विज्ञान कहलाता है। ये तब की परिभाषा है जब हमारा देश सोने कीचिडिया कहलाता था ।जबकि उस वक्त हमारे पास कोई केमिकल फर्टिलाइजर्स ,पेस्टिसाइड,हाइब्रिड सीड्स ,पानी के संसाधन अर्थात बोरे बेल नहीं हुआ करते थे। खेती वर्षा पर निर्भर थी। खेती एनिमल्स विशेष तौर से बैल  पर निर्भर थी। बिजली नहीं थी ,ट्रांसपोर्ट के साधन नहीं थे । खेतों मैं मोटे अनाजों का उत्पादन किया जाता था । गेहूं का उत्पादनभी नहीं  था ।
ग्रीन  रिवोल्यूशन  के वक्त विभिन्न प्रकार के   हाइब्रिड सीड्स  , सिंचाई के सधान,रासायनिक उर्वरक  , ट्यूब वेल, ट्रैक्टर्स,आदि विकसित किये गये  जिससे हम खाद्यान्न  में  तो  निर्भर  हो  गये परंतु  रसायनों के  अंधाधुंध प्रयोग से जमीन,जैव विविधता ,प्रकृति और उसके संसाधनों  जीवन और जीवन के पांच महाभूतों,स्वास्थ्य,भू जल का स्तर जमीन  की उर्वरा शक्ति,भोजन  के  स्वाद,एवं जहरीले भोजन  ,जंगल के क्षेत्र में कमी आदि से  जुड़ें  हुए बहुत सारी समस्याएं एवं दुष्परिणाम सामने आए  जिससे समाज में बहुत  बीमारियां उभरने लगीं ।  जिस से  बहुत सारे नाशीजीवों की समस्याएं उभर कर सामने आयीं ,जमीन का जल स्तर  नीचे च ला गया। जलाशय  बंद हो गई , खेती बाजार पर आधारित होगयी अर्थात बाजार के द्वारा हाईजैक हो गई ।और फसल उत्पादों का उत्पादन मूल्य बढ़ गया। प्रकृति और उसके संसाधन  नष्ट हो गए ।जमीन मैं जीवांश कार्बन  कम हो जाने से जमीन  की उर्वरा शक्ति क्षीण  हो गई।उपरोक्त समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अब एग्रोनॉमी की नवीन परिभाषा   इस प्रकार  से लिख सकते हैं।
भूमि तथा फसलों का वह प्रबंधन जिससे कृषक परिवार की हर जरूरत पूरी हो जाए और भूमि की उर्वरता, पारिस्थितिक तंत्र की सक्रियता, जैव विविधता, भूगर्भ  जल के स्तर,पर कोई विपरीप / प्रतिकूल प्रभाव  ना पड़े।,एग्रोनॉमी कहलाता 
 है।
 कॉमिकल तब छोड़ पाओगे  जब  भूमि की उर्वरता
 बढ़ाओगे ।
1,खेतों की मेड़ों पर पेड़ लगाकर। 2,वृक्षों के बगैर प्राकृतिक खेती नहीं हो सकती।3,वृक्ष एक ज्ञान है।4,वृक्षों से बायोडायवर्सिटी  बद्ती  है। 5, पशुओं के बगैर प्राकृतिक खेती नहीं हो सकती।6,फसल नहीं फसलें बोनी  चाहिए़। 7,खेती हम अपने लिय नहीं करते बल्कि आगे की  पीढ़ियों के लिय करते हैं। हमे खेती  परमार्थ लिय के लिए करनी है। खेती का मतलब बच्चों का भविष्य उज्जवल हो। यही प्राकृतिक खेती का मोटो है 7,भूजल स्तर को ऊपर करना ।8 कृषि जीवनका आधार है।8,जलसंरक्षण हेतु कृषकों  के पास तालाब होना चाहिए।9,आज अगर देश में गैस बंद हो जाए तो रोटी नहीं मिलेगी क्यों कि हमारेपास लकड़ी नही है जलने के लिए। स्वावलम्बी  भारत  स्वावलंबी   किसान  चाहिए़।
प्लान :- 1,बृक्ष ,पालतूपशु,फसल  विविधता,भूगर्भ स्तर  को ध्यान में रखना।
खरीफ,:- रोटी; ज्वार,,बाजरा,मक्का आदि।
डाल:- उर्दूं ,मूंग ,अरहर,
तेल :- मूंगफली ,सोयाबीन, तिल
चारा: हरा चारा,खली
 खेती आनंद ,खुशी , और जीवन का  विषय है ।
रबी:- रोटी:- गेहूं जौ ,चना ,मटर और  मसूर  
तेल:- राई अलसी
सब्जी:-
बृक्ष:- नीम ,शीशम,जामुन,सुबबूलाल  ,आम 
  बीच में :-  सृजन,पपीता,बांस मेड पर  नीबू 
बाग़ :- खरपतवार साफ नहीं कराना चाहिए
 जायद  :- कुकर्बिट्स  
कर्ज और मर्ज़ से मुक्ति
जीने दो और जिओ  
सर्वे भवन्तु सूखना ,सर्व  संतु नीरामया 
 दॉगले चरित्र के साथ खेती न करें।
प्राकृतिक खेती एक स्थाई  और स्वास्थजीवन है।
प्राकृतिक् खेती  से  हमे धन नहीं कमाना है बल्कि जीवन को बचाना है ।
प्राकृतिक खेती को इतना जटिल नहीं बनाना है कि करने में किसान ऊब जाय ।
 जय प्राकृतिक खेती 


 












Friday, July 10, 2026

आईपीएम के कुछ सॉल्यूशंस

1, आप कीट  अथवा नशीजीवों को ना छेड़ो  कीट अथवा नशीजीव आपको नहीं छेड़ेगा । जिस नाशी जीव को हम मारते हैं वही नासि जीव हमारी फसल में महामारी के रूप में उभरेगा ।
2,Aphid अथवा  चैंपा एक सप्ताह में 85 गुना बढ़ता है। 
3, लेडी बर्ड बीटल, सिरफिड  फ्लाई, विभिन्नपरकार की spiders,एफिडियस, क्रिसॉपरला, विभिन्न परकार के पर भक्षी एवं परजीवी किट, डिफरेंट टाइप्स ऑफ इंसेक्ट पैथोजेंस , आदि जैव नियंत्रण कारक विभिन्न प्रकार के नासिजीवों की संख्या का प्रबंधन करने में सहायक होतेहैं।
4 आप कीटों को समझने की कोशिश करें ।26 कीटों की जानकारी अगर किशआनों  को है तो वे खेतों में  जहर नहीं डालें।
5 मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने से मिट्टी की वाटर होल्डिंग कैपेसिटी बढ़ायेगी ।

6, विभिन्नपकार के ट्रैप्स को इस्तेमाल करना चाहिय।
7 खेतों मैं  जीवामृत डालना चाहिए।
7ओपन ग्रेजिंग ऑफ कैटल्स।
8 टर्मिट इस नूतन एनिमी।
9 संतुलित खादों का उपयोग। तथा संतुलित सीड रेट।

Thursday, July 9, 2026

आज के परिदृश्य में खेती में वांछित परिवर्तन

आज के परिदृश्य में खेती में विभिन्न प्रकार के परिवर्तनों की आवश्यकता  है। अभी तक हम लागत पर आधारित खेती को प्रमुखता दे रहे थे जिससे खेती में  लगत तो बड़ गई परंतु उपज नहीं बढ़ी।अब  लागत आधारित खेती  कa सफर पूरा हुआ।अब खेती को व्यवसाय ,समाज  सहकारिता एवं युवाओं  पर आधारित  खेती की आवश्यकता प्रतीत हो रही है। अब इनपुट आधारित कृषि का सफर पूरा हुआ। अब कृषि  शोध कार्य ,शिक्षा, तथा सहकारिता  तथा उत्पादन प्रबंधन  आधारित  खेती की जरूरत महसूस हो रही दै।इसके अतिरिक्त आज की  खेती  इकोलॉजी,इकॉनमी तथा रिजल्ट आधारित शोध पर आधारित  होनी चाहिय।
व्यवसाय  मतलब उत्पादन का    प्रबंधन,गुणवत्ता का प्रमाणि      कारण एवं  विपणन  पर आधारित शोध कार्य पर  आधारित  खेती की जरूरत है। गाँव का माल गांव मैं पहले बिकेगा  तथा  बचा हुआ  सामान शहर में बेचा जाएगा।
2, प्रकृति की  व्यवस्था को समझ कर खेती की जय ना की प्रकृति की व्यवस्था के समांतर दूसरी व्यवस्था खड़ी कर के खेती की जाय । खेती में बदलाव सिर्फ खेत के आधार पर मत करो बल्कि पूरे कृषितंत्र के आधार पर करो।
3 ध्यान रहे कि खेत मैं ही खाद बनती है। खेत मैं ही प्रबंधन होता हैऔर खेत में ही उत्पादन होता है।
4,प्रकृति मै  नियम ,नियंत्रण और प्रबंधन की पद्धति चलती है।
5 हमारी खेती मार्केट ने हाईजैक करली और किसानों को पता भी नहीं चला। 
6 कृषि मैं लाभ से जायदा स्वास्थ्य की जरूरत है। बाजार आधारित खेती ने ही  उत्पादन खर्च बढ़ाया।
7, रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से जमीन के ऊपर एवं नीचे पाई जाने वली जैवविविधता नष्ट हो जाने से जमीन मैं 
जीवाश्म कार्बन घटने से जमीन की उर्वरा शक्ति घट गई जिसे पुनः बढ़ाना पड़ेगा।इसके लिय जमीन मै जीवाश्म कार्बन की माट्रा बाधना पड़ेगा। इसके लिय ग्रीन मैन्यूरिंग  ,गोबर की खाद ,फसलों के अवशेष  को खेतों में डालना पडेगा। खेतों की उर्वरता धीरे धीरे बढ़ सकेगी।
8 फसल विविधता  प्राकृतिक खेती  की एक प्रमुख गतिविधि है।