Saturday, February 14, 2026

Different types of farming

1.Old Tradditional  Farming 
2.Jeevan Nirvahan Kheti.
3.Mishrit kheti.
4.Samekit  kheti.or Integrated Farming.
5,Drip irrigation .
6,Mulching System.
7,Permaculture
8,Zerobidget Farming.
9,Natural Farming.
10 ,IPM Farming System.
11..Subhash Paleker Zerobudget farming 







5.

Monday, January 12, 2026

फसलों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का विज्ञान

भूमिमैं कार्बन बढ़ा दो। जीवाणु कार्बन को खाएंगे फिर मरेंगे और भूमि में फिर ह्यूमस बनेगा इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। इतनी सी साइंस है भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने की।
फसलों को जीवांश की जरूरत होती है। जीवांश विभिन्न पकार फसलों के अवशेषों तथा जीवों के मल मूत्र आदि को जमीन अथवा खेतों में डालने से जीवाणुओं ki क्रिया के द्वरा ह्यूमस केरूप में बनता है जो भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ात है। अतः भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के  लिए खेतों में जीवो का मल मत्र तथा फसलों के अवशेष आदि डालने चहिए ।
हमें प्राकृतिक खेती ही करनी चाहिए और रसायनों के उपयोग को खेती मैं बिल्कुल ही बंद करनाचहिए । क्योंकि रसायनऑन के अवशेष खाद्य श्रृंखला केद हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं और हमें बीमारियां देते हैं। इस प्रकार से रासायनिकद्वारा विषाक्त भोजन मिलता है। हमारे आगे आने वाली पीढियां को तो यह भी नसीब नहीं होगा क्योंकि रसायनों के उपयोग से जमीन मेंपाए जान वाले उपयोगी जवाणु जो हमस का निर्माण करते ह खत्म होने की कगार पर हैं ।
जमीन को जिंदा करदो इतना सा विज्ञान है प्राकृतिक खेती का । जमीन में जीवाणुओं की  वापसी करनa ही प्राकृतिक खेती का तरीकa है।
फसल पारिस्थितिक तंत्रमैं जैव वविधता बढ़ाने के लिए खेतों की मेड़ों पर थोड़ी-थोड़ीद विभिन्न प्रकार के पेड़ लगाने चाहिए जिस पर चिड़िया अपना बेड का बना सके और वह खेतों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार k नाशिकीबों की संख्या क नियंत्रित कर सके। 
0 खेतों के लेवल ka समतलीकरण करना चाहिए और उनके चारों तरफ चौड़ी मेड बनाना चहिएजिससे खेतों का जीवांश कार्बन दूसरेखेतों मैं बहकर न जा सके। 
नशीजीबों के प्रबंधन ह विभिन्न प्रकार की विधियां जैसे परंपरागतविधिया, कल्चरल विधियां, मैकेनिकलवधियां, जेनेटिकली वधियां, तथा नासिजीव निगरानी एवं आकलन तथा फसल पारिस्थितिकतंत विश्लेषण करते हुए आवश्यक एवं उचित प्रकार का इटरवेंशनका करते हुए (सही नासि जीवों पर, सही नसी जीवनशकों का, सही समय पर, सहीमत्रा में, सही विधि द्वारा) उपयोग करते हुए सिर्फ किसी विशेष आपातकालीन स्थिति के निदान हेतु प्रयोग करते हुए फसल पारिस्थितिकतत्र में  नशीजीवों की संख्या ko आर्थिक हानी स्टार के नीचे रखकरनाशी जीवों की समस्याओं से जब  छुटकारा  प्राप्त कियाजता है तब हम उसे एकीकृत नासिक प्रबंधन कहते हैं। एकीकृत नाशिजीव  प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य कम से कम खर्चे में तथा रसायनोंका कम से  कम उपयोग करते हुए तथा प्रकृति जीवन और समाज को कम से काम बाधित करतेहुए खाने के योग सुरक्षित तथा व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों ka उत्पादन करके सुरक्षित भोजन केसा खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित करना तथा कृषि उत्पादों का अधिक से अधिक विक्रय मूल्य प्राप्त करना है।

Tuesday, December 2, 2025

आईपीएम की नवीन परिभाषा

आईपीएम बीज से लेकर सुरक्षित फसल उत्पादों के उत्पादन, भंडारण, विपणन, व्यापार, व फसल उत्पादों के अंतिम प्रयोग एवं अगली फसल की  बुवाई  की तैयारी तक की नासि जीव प्रबंधन सहित संपूर्ण कृषि तंत्र के समेकित प्रबंधन की एक कार्य शैली, विज्ञान, दर्शन ,अध्यात्म, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, टेक्नोलॉजी, प्रबंधन, योजना, नीति शस्त्र एवं विचारधारा है जिसमें कम से कम खर्चे में, रसायनों का कम से कम उपयोग करते हुए ,सामुदायिक स्वास्थ्य, फसल पारिस्थितिकतत्र, जैववविधता, प्रकृति, पर्यावरण, समाज, एवं जीवन तथा जीवन के पंच महाभूतों जैसे पृथ्वी, पानी, अग्नि, आकाश, और वायु को कम से कम बाधित करते हुए तथा खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति का सवर्धन एवं प्रकृति के संसाधनों का संरक्षण करते हुए अथवा बढ़ाते हुए खेती करने की एवं वनस्पति संरक्षण करने की सभी विधियों को समेकित रूप से प्रयोग करते हुए जिसमें रासायनिक विधियों का उपयोग सिर्फ अंतिम विकल्प के रूप में किसी आपातकाल परिस्थिति के निदान हेतु प्रयोग करते हुए खेतोंमे नशीजीवों  की संख्या को आर्थिक हानी स्टार के नीचे सीमित रखते हुए नशीजीवों की समस्याओं से छुटकारा प्राप्त करने के सथ-साथ खाने के लिए सुरक्षित तथा व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों का अधिक से अधिक उत्पादन  करते हुए तथा बाजार से अधिक से अधिक विक्रय मूल्य प्राप्त किया जाता है आई पी एम कहलाता है।

Wednesday, November 12, 2025

आईपीएम एवं प्राकृतिक खेती

आईपीएम सिर्फ नाशिजीव प्रबंधन तक सीमित नहीं है यह संपूर्ण कृषि तंत्र के प्रबंधन की एक समेकित विचारधारा है जिसमें नाशिजीव प्रबंधन सहित जमीन की उर्वरा शक्ति, सी:न अनुपात ,जमीन में ह्यूमस की मात्रा तथा सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या, फसल पारिस्थितिकतत्र मे जैववविधता एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा रासायनिक इनपुट्स केisthan वनस्पतियों पर आधारित इनपुट्स को बढ़ावा देकरखेती कीजती है।