Sunday, March 15, 2026

इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आईपीएम)

         इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आईपीएम)
1,आईपीएम एक प्रकार का सामाजिक आंदोलन है जिसका उद्देश्य कम से कम खर्चे में, रसायनों का कम से कम उपयोग करते हुए तथा जीवन, जलवायु ,पर्यावरण ,जैव विविधता, फसल पारिस्थितिक तंत्र, प्रकृति और समाज को कम से कम बाधित करते हुए फसल उत्पादन ,फसल रक्षा तथा नाशिजीव प्रबंधन की सभी विधियों को समेकित रूप से प्रयोग करते हुए जिसमें रासायनिक विधियों  का उपयोग सिर्फ किसी आपातकालीन स्थिति के निदान हेतु अंतिम विकल्प के रूप में प्रयोग करते हुए फसल पारिस्थितिक तंत्र में पाए जाने वाले हानिकारक जीवों की संख्या को आर्थिक हानी स्टार के नीचे सीमित रखते हुए खाने के योग्य सुरक्षित भोजनके साथ खाद्य सुरक्षा , जीवन तथा इकोलॉजिकल सुरक्षा अर्थात पारिस्थितिकतंत्रीय एवं पर्यावरण सुरक्षा के साथ साथ व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कषि उत्पादों का उत्पादन किया जाता है तथा उत्पादों के अधिकतम विक्रय मूल्य की अपेक्षा की जाती है आईपीएम कहलाता है।
2, आईपीएम-नासिजीव प्रबंधन सहित संपूर्ण कृषि तंत्र अथवा पद्धति के समेकित प्रबंधन की एक विचारधारा है जिसमें खाने के योग्य सुरक्षित तथा व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन कम से कम खर्च तथा जन ,जमीन, जंगल, जलवायु, जानवर, जैव विविधता, पर्यावरण, तथा पकृति के संसाधनों एवं जीवन के पांच महाभूतों का संरक्षण करते हुए एवं समाज को कम से कम बाधित करतेहुए खेती की जाती है अथवा नाशिजीव प्रबंधन किया जाता है आईपीएम कहलाता है। आईपीएम के क्रियान्वयन हेतु नासिजीव प्रबंधन की सभी विधियों को समेकित रूप से प्रयोग किया जाता है तथा रसायनों का प्रयोग दी गई संस्तुति के अनुसार अंतिम विकल्प के रूमें किया जाता है।
3,IPM is a social  movement  to reduce the use of chemicals in agriculture and to maintain harmony with nature and society.
4,Suppression of pest population by any meanse to a level at which the harm due to pest become minimum, insignificant or  minor is called pest management. When more than one methods are used to suppress the pest population below ETL  is called as Integrated Pest Management (,IPM)¡
5The minimum pest population above which the adoption of  pest management methods  is recmmonded or suggested is called as Economic Thrshold level.
6,To get ridof from fr pest problem with minimum expenditure, minimum use of chemicals and least disurbance to l community health,ife , environment,ecosystem ,biodiversity,nature and it's resources , and  society ithrough adoption of all available, affordable, and feasible methods of pest management is to suppress the pest population below ETL is called as IPM.
7,IPM is an integrated management of complete Agricultural System including Pest management.
आईपीएम-नाशीजीव  प्रबंधन सहित संपूर्ण कृषि तंत्र अथवा पद्धति के  समेकित प्रबंधन की एक विचारधारा ।

Monday, March 9, 2026

Integrated Pest Management (IPM)

Integrated Pest Management (IPM)
            एकीकृत नाशिजीव प्रबंधन 
Of the Farmers, By the Farmers  ,For the  Farmers
 किसानों का, किसानों के द्वारा, किसानों के लिए 
Of The People,By the People,For the People.
लोगों का, लोगों के द्वारा, लोगों के लिए

Sunday, March 8, 2026

आई पी एम तथा अन्य रसायन रहित खेती को बढ़ावा देने के लिए कुछ बाधाएं

आईपीएम -नाशिजीव प्रबंधन सहित संपूर्ण कृषि तंत्र अथवा पद्धति के समेकित प्रबंधन की एक विचारधारा है जिसमें खाने के योग्य सुरक्षित तथा व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन कम से कम खर्च तथा जन, जमीन, जंगल, जलवायु, जानवर,जैव विविधता,  जन, पर्यावरण,, तथा प्रकृति के ससाधनों तथा जीवन के पंचमहाभूत का संरक्षण  करते हुए एवं समाज को कम से कम बाधित करते हुए खेती की जाती है अथवा नाशीजीव  प्रबंधन किया जाता है आईपीएम कहलाता है। आईपीएम के क्रियान्वयन हेतु रसायनों का दी गई संस्कृति के हिसाब से अंतिम विकल्प के रूप में किया जाता है।
      विभिन्न वैज्ञानिकों, कृषि प्रचार एवं प्रसार कार्यकर्ताओं, बुद्ध जीवियों तथा प्रगतिशील किसानों के द्वारा विकसित की गई विभिन्न तरह की  खेती की पद्धतियों में से सुरक्षित विधियों को अपनाकर एक उपयुक्त रणनीति अपना कर  सुरक्षित भोजन के साथ साथ खाद्यसरक्षा को सुनिश्चित किया जाता है इसी को आईपीएम कहते हैं। आईपीएम के क्रियान्वयन हेतु विभिन्न प्रकार की  बाधाएं  इस प्रकार हैं।
1, किसानों के द्वार पर आईपीएम तथा प्राकृतिक खेती के इनपुट्स की अनु उपलब्धता ।
2, आई पी एम तथा प्राकृतिक खेती के इनपुट के उत्पादन हेतु उद्यमियों मै आईपीएम इनपुट की लॉन्चिविटी कम होने की वजह से आईपीएम इनपुट्सक उत्पादन हेतुरुचि न होना।
3, गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन न करपाना।
4, कृषि उत्पादों के उपभोक्ताओं मैं इस प्रकार की जानकारी की रसायनों के प्रयोग से उत्पादित कृषि उत्पादों में रसायनों के जहरीलेअवशेष अवशेष पाए जाते हैं जिससे कृषि उत्पादन विषाक्त  हो  चुके हैं  जो भोजन श्रृंखला के द्वारा हमारे शरीर मैं पहुंच कर एकत्रित होने पर विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न करते हैं के बारे मैं  जागरूकता बढ़ानी चाहिए।अतः हमें इन पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
5, कृषि उत्पादों के विपणनहेत बंजारों की अनु उपलब्धता। 
6, कृषि उत्पादों का कभी-कभी उत्पादन लागत से भी कम विक्रय मल्य मिलना।
7, कृषि उत्पादों की गणवत्ताको तथा उपभोक्ता का भरोसा बरकरार रखना ।
8, रासायनिक कीटनाशकों तथा उर्वरकों की उत्पादन कंपनियो का परोक्ष रूप में विरोध
9, सरकारी कर्मचारियों का रसायनमुक्त विधियों के प्रचार एवं प्रसार में रुचि ना लेना ।
10, रासायनिक कीटनाशक किसानों के घर पर न बनने की वजह से उनका उत्पादन कंपनियों में किया जाता है वहां पर उनकी गुणवत्ता का भरोसा नहीं किया जा सकता। 
11, रासायनिक कीटनाशकों का फ्रिक्वेंट पंजीकरण करना ।
12, रासायनिक कीटनाशकों का टीवी द्वारा प्रचार करना ।
13, ऑर्गेनिक  फार्मिंग में बहुत बड़ा झोल है 
14, किसानों के आय बढ़ाने की बात की  जाती है परंतु उनके कृषि उत्पादों के उत्पादन के बढ़ाने की तथा उसके गुणवत्ता की और ध्यान नहीं दिया जाता है।
15, किसान हितैषी नीतियों का ना होना।
16, कृषि उत्पादोंकआ लाभदायक मूल्य का न मिलना।
17, किसान पैसे देकर जहर खरीद रहा है और उसे लापरवाही से प्रयोग कर रहा है इस और ध्यान नहीं दिया जा रहा ।
18, मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जैव विविधता जीवांशकर्बन प्राकृतिक संसाधनों था जीवन के पंचमहाभूत के संरक्षण ह ध्यान ना देना।
18, मल्टीकपिंग, इकोलॉजिकल इंजीनियरिंग,अंतर फसलों तथा बॉर्डर फसलों का लाभदायक कीट ऑन के संरक्षण हेतु ना लगाना ।
19, रसायन रहित खेती की विधियों को बढ़ावा दने, प्रकृति के वैभव को बढने, पर्यावरण प्रदूषण को घटाना, जैव विविधता तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए दो किसान भाई काम करते हैं तथा समाजिकउ स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं उनकोप्रोत्साहन हेतु कुछ न कुछ अनुदान अवश्य मिलना चाहिए जैसे रासायनिकफर्टिलाइजर्स की  खरीद पर किसानों को अनुदान मिलता है ।
20 किसानों को रासायनिक कटनाशकों के
 अंधाधुंध प्रयोग को न करने के लिए जागरूक करना चाहिए 21, मशीनरीकरण से कृषकों  ने पशुओं तथा जानवरों को पालना कम कर दिया है जिससे उनसे उत्सर्जित गोबर अथवा कार्बनिक पदार्थ जो जमीन में डाला जाता था और  उसकोजमीन मैं पाए जाने वाले जीवाणु अपनेभीजन के के रूप में खाते थे और उससे ह्यूमस बनता था जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती थी  यह कार्य अब नहीं होता है ।इसलिए किसानों को पशुओं को पालना चाहिए़ ।
22, प्राकृतिकखेती  के इनपुट्स तथा विधियों को आईपीएम में शामिल करना चाहिए।
23, खेतों के चारों तरफ मेड  तथा मेड पर पेड़ लगाने चाहिए जो पक्षियों  के लिए बैठकों की तरह प्रयोग किया जाते हैं  और ये पक्षी कीटों के नियंत्रण में पाना योगदान देते हैं।
24,

Thursday, February 26, 2026

बिना पानी, बिना जहर के होने वाली गुरु नानक खेती अथवा प्राकृतिक पारिस्थितिकीये खेती,-Psradoxial krishi by Dr Vinod Chaudhary.

इस खेती के निम्नलिखित तीनसद्धांत हैं:-
1,Breaking of hard core layer of soil of nearly 7 inches to 25 inches made due to use of  tractor,use of chemical fertilizers and pesticides which  prevents the entry of water in soil.It is done with the help of subsoiler.
2,Flood irrigation  and make ridges and furrows . Growcrops on beds .Mulching on beds with crops like Gowar .
3,Irrigate the crops in furrows.
4Principles of this Farming :-
   -किसी भी पौधे के विकास के लिए पानी नहीं चाहिए बल्कि नमी चाहिए ।
   -  नमी  नालियों में देना है ।
     -जमीन को सनलाइट भी नहीं चाहिए क्योंकि इससे कार्बन Co2 बनकर उड़ता है। इसलिए ज्यादा जुताई भी नहीं चाहिए।
      -यूरिया जैसे रसायन ऑन तथा विभिन्न प्रकार के रसायनिक  कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से मनुष्य म   नशा की प्रवृत्ति उभरने लगती है। गेहूं और धन यह हमारा भोजन नहीं है यह सिरों तथा पक्षियों का भोजन है।
    -सिंचाई सिर्फ नालियों में करनी चाहिए जिससे नालियों की नमी बर्ड्स पर पहुंच जाएगी जो पौधों के विकास में सहायता करती है। 
      -करीब 138 फसलों में से हम सिर्फ चार फसलों तक सीमित रह गए हैं जिनके लिए पानी बर्बाद होता है ।
       -मल्चर से मल्चिंग काटकर बेड पर गिरादते हैं।
       -   खरपतवारऑन को भी मल्चिंग के काम में लाते हैं।  
       -किस प्रकार की खेती के लिए एक छोटा ट्रैक्टर चाहिए। 
         -, इस प्रकार की खेती में जमीन में सूक्ष्म जीवाणु तथा पानी की बचत होती है। 
         ,-इस प्रकार की खेती में   फसल हमेशा उत्तर दक्षिण की दिशा में लगाते हैं।   
       -खेती से संबंधित या खेती से जुड़े हुए अन्य बिजनेस को भी बढ़ाया जा सकता है।  
        -इस प्रकार की खेती से ग्लोबल वार्मिंग तथा क्लाइमेट चेंज के प्रभाव से भी बचा जा सकता है।