Saturday, June 13, 2026

परमाकल्चर Shashwat jeevanshaili शाश्वत /स्थाई जीवन शैली

परमाकल्चर Shashwat jeevanshaili शाश्वत /स्थाई जीवन शैली:-सामुदायिक स्वास्थ्य , पारिस्थितिकतंत्र, जैवविविधता, पर्यावरण, जीवन , प्रकृति और समाज तथा जीवन के पांच महाभूतों, क्षिति ,जल, पावक, गगन, समीरा, खाने योग्य शुद्ध  भोजन के सथ-साथ खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित  करने की जिम्मेदारी  का निर्वहन करते हुए  खेती करना फार्माकल्चर अथवा शाश्वत जीवन शैली  कहलाता है। यह भी एक प्रकार से प्राकृतिक खेती का ही एक  सुधराहुआ   रूप है जिसमें फसल पारिस्थितिकी तंत्र को जंगल की तरह ईस प्रकार से डिजाइन किया जाता है जिससे मानव समाज एवं जीवो को सांस लेने हेतु शुद्ध हवा , खाने योग्य शुद्ध भोजन, पीने के लिए शुद्ध पानी तथा खेती अथवा फसल उत्पादन हेतु उर्वरक भूमि,  भूमि मैं जीवांश कार्बन तथा ह्यूमस तथा सूक्ष्म जीवों की पर्याप्त मात्रा मौजूद हो ।जीवों  से पहले प्रकृति का जन्म हुआ।.प्रकृति में चल रही स्वचालित (Self Organised), स्वयं सक्रिय(Self active), स्वयं पोशी (Self nourished), स्वयं विकाशी(Self developing), स्वयं नियोजित (Self planned), सहजीवी (Symbiotic), एवं आत्मनिर्भर (Self sustained) फसल उत्पादन, फसल रक्षा एवं फसल प्रबंधन पद्धति के आधार पर प्रकृति में प्राकृतिक खेती होती है जिसमें मनुष्य का कोई योगदान नहीं होता है। प्रकृति में चल रही इसी प्राकृतिक खेती की व्यवस्था का अध्ययन करके अब प्राकृतिक खेती को समाज के विकास एवं उत्थान हेतु बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रकृति की समग्रता तथा उसके स्वरूप को बचाते हुए अथवा उसकी रक्षा करते हुए स्वयं का ज्ञान तथा समझ को इस्तेमाल करते हुए खेती करना ही प्राकृतिक खेती है। फसलों का भोजन जीवाश्म अथवा माइक्रोऑर्गेनाइज्म आदी की डेड इकाइयां हैं।
 2.    प्राकृतिक खेती आईपीएम का ही एक सुधरा 
हुआ रूप है जिसमें फसलों के उत्पादन एवं फसलों की रक्षा हेतु रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है तथा भूमि की उर्वरा शक्ति ,खेतों की जैव विविधता ,जमीन में जैविक कार्बन की मात्रा तथा ह्यूमस तथा इसको जमीन में बनाने सूक्ष्मजीव और सूक्ष्म तत्व ऑन ,जमीन में भूमि जल स्तर को ऊपर लाने वाले प्रयासों तथा वर्षा जल संचयन के प्रयासों को बढ़ावा देकर तथा देसी गायों ,फसलों के देशी बीजों की प्रजातियां को संरक्षित करते हुए, गायों के मूत्र एवं गोबर के प्रयोग को शामिल करते हुए तथा देशी बीजों को प्रयोग को फसल उत्पादन में बढ़ावा देते हुए उचित तथा लाभकारी एकल फसल चक्र पद्धति के स्थान पर बहू फसली खेती की फसल चक्र को अपना कर नवीन  विधियों के साथ-साथ पारंपरिक विधियों को शामिल करते हुए कृषक परिवारों जिसमें जानवर भी शामिल है समाज ,सरकार और बाजार की जरूरत के हिसाब से फसलों का नियोजन अथवा चयन करते हुए ,स्वस्थ समाज की कामना करते हुए ,कम से कम खर्चे में अथवा शून्य लागत पर जो खेती की जाती है उसे ही प्राकृतिक खेती कहते हैं यह खेती देसी बीजों, देसी गाय, देसी केंचुआ, देसी पद्धतियों, देसी गाय के मल मूत्र एवं गोबर के प्रयोग पर आधारित इनपुट तथा देसी परंपराओं पर आधारित खेती करने का तरीका है।
जीवन शैली को स्थायित्व प्रदान करना अथवा जीवन शैली को शाश्वत बनाना ही फर्माकल्चर अथवा शाश्वत जीवन शैली कहते हैं। फार्माकल्चर अथवा शाश्वत जीवन शैली जंगल के सिद्धांतों पर आधारित है। जिसमें मानव का हस्ताक्षऐप बिल्कुल नहीं किया जाता है।
No management is the best management.
प्रबंधनन न करना ही उत्तम प्रबंधन  है।
पेड़ लगाना, पेड़ों को वृक्षों  में परिवर्तित करना, तथा  रसायन रहित फलों का उत्पादन करना करन एक सोच  मैं परिवर्तन का तरीका है। इस प्रकार की सोच को विकसित करना ही परमकल्चर  का मुख्य उदश्य है। सुबह से शाम तक किए जाने वले कार्यों को जीवन विधान कहते हैं। लोगों को लोगों के साथ तथा प्रकृति के साथ कनेक्ट करना  या जुड़ाव करना ही जीवन विधान है।
Climate change is not only environmental issue but also it is a survival issue.
Let's make more and more jungle or forests to conserve and survive  wild life fauna and flora.
We are taking many things from nature and not giving any thing to nature.
शरीर से शिव गया तो शव बन गया।
लेट्स सेव नेचर। वाट वे आर्डपिंग तो सेव नेचर।
लेट्स स्टॉप कल्चर ऑफ  एंड थ्रो।
किसान हमारी  मूलभूत नर्स हैं।
पैसे के  लालच में हमनेत खेती मैं   यंत्रों एवं रसायनों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया  जिसके बहुत सारे दुष्परिणाम सामने आने लगे।
प्रकृति में बदलाव लाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है बल्कि हमारी भी है । हमें अपनी जम्मेदारी लेनी होगी और हवा,पानी,खाना,अनाज,ओ2 को आगे आने वाली पीढियां के लिए बचाना होगा  और यह सलाह हमीं दूसरों को भी देनीचहिय और गदीर धीरे प्रवर्तन लाना चाहिए़। मिट्टी की उर्वरा शक्ति बचाना चाहिए़। तथा कचरे को कंपोस्ट में बदलना चाहिए। धीरे धीरे  यह अभियान मै बदल जाएगा।
जीवन ,पकृति, पारिस्थितिकतत्र, जैवविविधता , के सरक्षण एवं  सुधार  हेतु  जिम्मेदारी लेते हुए  खेती करना  ही परम कलचेर अथवा शाश्वत जीवनशैली कहलाता है।

Monday, June 8, 2026

Niti Aayog ke Anusar Prakritik kheti ki paribhasha.

 नीति आयोग के अनुसार प्राकृतिक खेती   एक रसायन मुक्त पारंपरिक कृषि पद्धति है। यह कृषिपैरिसस्थितिकई अथवा एग्रो इकोसिस्टम अथवा एग्रो इकोसिस्टम पर आधारित एक हा कृषि प्रणाली है जो फसलों, पेड़ों,और पशु धन का एक साथ एकीकृत करती है।

Wednesday, June 3, 2026

दिमाग की गिजा हो या  गिजाऐ  जिस्मानी
यहां  तो हर गिजा मैं मिलावट मिलती है ।

रसायनिक   खेती  हो या खेती(कीटों ) के रसायन
 इनमें हर चीज़ में मिलावट मिलती है ।
 किसानों करो ना प्रयोग रसायन इनसे सेहद बहुत बिगड़ती 
इनसे सेहद बहुत बिगड़ती ,खेतों की मिट्टी बंजर पड़ती   अरे किसानों खेतों मैं  करो न प्रयोग रसायन इनसे सेहाद बहुत  बिगड़ती। 
इनसे जैवविविधता मरती ,मिट्टी मैं ऑर्गेनिक  कार्बन घटता किसानो करो न प्रयोग रसायन इनसे  इनसे शहदबहुत बिगड़ती।
अरे शहद बहुत बिगड़ती फसलों मैं कीटों की समस्याएं और बढ़ती  ,अरे किसानों करो न प्रयोग रसायन  इंसेसहाद बहुत बिगड़ती।
सेहद बहुत बिगड़ती  किसानों की आमदनी (इनकम ) है घटती ।अरे किसानों करो न प्रयोग रसायन इनसे सेहद  बहुत बिगड़ती 
सेहद बहुत बिगड़ती खेतों में मधुमक्खी तितलियां घटती फसलों की उपज बहुतकम हो जय  इनसे  सेहद बहुत बिगड़ती  ।किसानों करो ना प्रयोग  रसायन  इनसे सेहद बहुत बिगड़ती।
सेहद  बहुत बिगड़ती भोजन  जहरीला हो जावे 
परिवार  पड़  जावे बीमार  भैया  सेहद बहुत बिगड़ती।
आई पी एम तुम अपनाओ भरपूर और स्वस्थ फसल तुम पाओ भोजन के भरे रहे हैं भंडार इससे सेहत कभी ना बिगड़ी।

Sunday, May 31, 2026

विभिन्न प्रकार की खेती की पद्धतियां

          विभिन्न प्रकार की खेती की पद्धतियां
1,Traditional Farming. पारंपरिक खेती:-
यह एक प्रकार की कृषिपदति है जो सदियों से चली आ रही है जब हमारे देश के पास सिंचाई के साधन रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक, हाइब्रिड सीड्स,, तथा आधुनिक कृषि यंत्र नहीं होते थे तथा खेती पूर्ण रूप से मानव श्रम, पशु शक्ति, प्राकृतिक वर्षा, तथा पशुओं के मल मूत्र पर आधारित उर्वरक उर्वरकों, आदि पर आधारित होती  थी। इसमें देसी बीज प्रयोग किए जाते  थे । यह खेती परिवार के सदस्यों के द्वारा तथा पुराने तरीके के कृषि  यंत्रों का प्रयोग कर के  की जाती थी । इस प्रकार की खेती में जमीन के अंदर जीवाश्म कार्बन भरपूरमत्रा में होता था । इस प्रकार की खेती मैं स्थानीय बीजों  का प्रयोग किया जाता था। यह खेतीजीवन निर्वाह  के लिए की जाती थी। जो पूर्ण रूप से वर्षा परआधरित होती थी।
2,रासायनिक खेती:-यह कृषि की एक ऐसी पद्धति है जिसमें फसलों की पैदावार तेजी से  बढ़ाने के लिए तथा उन्हें कीटों आदि से बचाने के लिया कृतिम रसायनों ,रासायनिक उर्वरको,कीटनाशकों ,तथा खरपतवार नाशकों का भारी मात्रा में उपयोग कियाजत है।
3,एकीकृत नाशिजीव प्रबंधन पर प्राधारित खेती:-
इस प्रकार की खेती मैं कम से कम खर्चे में, फसल उत्पादन एवं नासि जीव प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, ऑर्गेनिक खेती,  इकोफार्मिंग , तथा परमा कल्चर आदि की विभिन्न  विधियों  एवं गतिविधियों को समेकित रूप से प्रयोग करके  फसल पारिस्थितिक तंत्र में पाए जानेवाले नाशिजीवों की संख्या को आर्थिक हानी स्टार के नीचे सीमित रखा जाता है। इस प्रकार की खेती मैं  रसायनों  का उपयोग सिर्फ किसी आपातकाल स्थिति के निपटान हेतु अंतिम विकल्प के रूप मैं इस प्रकार से किया जाता है कि जीवन, प्रकृति ,पर्यावरण, और समाज के क्रियाकलाप बाधित ना हो और गुणवत्तायुक्त  कृषि उत्पादों का भरपूर उत्पादन के साथ अधिक से अधिक विक्रय मूल्य प्राप्त हो सके।
4 जैविक  खेती  अथवा ऑर्गेनिक खेती:- बिना रसायनों के की जानेवाली खेती को ऑर्गेनिक खेती कहते हैं।इसप्रकारकी  खेती में जैविक उर्वरक,जैविक कीटनाशक,जैविक खाद  जैसे हरी खाद   केंचुआ खाद ,या तो घर पर बनाकर या बाजार से खरीदकर प्रयोग की जाती है।इस प्रकार की खेती में रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता है।इसमें भी स्थानीय इनपुट का प्रयोग किया जाता है। इस खेती मैं जेनेटिकली मोडिफाइड सीड्स का भी प्रयोग नहीं किया जाता है।
5,Biodynemic kheti :खेत को जिंदसमझा जाएगा,स्वस्थ मृदा उत्पन्न करें,मानवता का पोषण करे ,प्रकृति के बहाव मैं चलती है,नक्षत्रों की गति पर चलती है।
6,नेचुरल फार्मिंग:पराकृतिक खेती 
     Local ecosystem ke tahad sabhi components  shamil karein .
Tree,crops,animals biodiversity,ko samil karte huy kheti karain,No tillage.
Natural farming is an improved version of IPM in which no chemical is used and farming is done by improving the fertility of soil, conserving Natural resources and conserving Natural resources and Panch mahabhootas of life.
7,Ecofarming :-  Treat the  soilnot the plant.Enhance the population of microorganisms.It is the combination of modern and traditional practices /approaches.
8,Permaculture:- It is also Traditional and modern approach.
9,Zero budget Naturally Farming:- By Subhash Paaleker.
, किसी भी इनपुट की कीमत नहीं लगानी है । सभी इनपुट्स  को किसानों के खेतों पर ही तैयार करना है। छोटे किसानों के लिय यह सबसे अच्छी खेती है। इसमें कोई भी रसायन तथा GMOS प्रयोग नहीं किए जाते हैं। बीज और खाद घर पर ही बनाएं जाते हैं।