1,Breaking of hard core layer of soil of nearly 7 inches to 25 inches made due to use of tractor,use of chemical fertilizers and pesticides which prevents the entry of water in soil.It is done with the help of subsoiler.
2,Flood irrigation and make ridges and furrows . Growcrops on beds .Mulching on beds with crops like Gowar .
3,Irrigate the crops in furrows.
4Principles of this Farming :-
-किसी भी पौधे के विकास के लिए पानी नहीं चाहिए बल्कि नमी चाहिए ।
- नमी नालियों में देना है ।
-जमीन को सनलाइट भी नहीं चाहिए क्योंकि इससे कार्बन Co2 बनकर उड़ता है। इसलिए ज्यादा जुताई भी नहीं चाहिए।
-यूरिया जैसे रसायन ऑन तथा विभिन्न प्रकार के रसायनिक कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से मनुष्य म नशा की प्रवृत्ति उभरने लगती है। गेहूं और धन यह हमारा भोजन नहीं है यह सिरों तथा पक्षियों का भोजन है।
-सिंचाई सिर्फ नालियों में करनी चाहिए जिससे नालियों की नमी बर्ड्स पर पहुंच जाएगी जो पौधों के विकास में सहायता करती है।
-करीब 138 फसलों में से हम सिर्फ चार फसलों तक सीमित रह गए हैं जिनके लिए पानी बर्बाद होता है ।
-मल्चर से मल्चिंग काटकर बेड पर गिरादते हैं।
- खरपतवारऑन को भी मल्चिंग के काम में लाते हैं।
-किस प्रकार की खेती के लिए एक छोटा ट्रैक्टर चाहिए।
-, इस प्रकार की खेती में जमीन में सूक्ष्म जीवाणु तथा पानी की बचत होती है।
,-इस प्रकार की खेती में फसल हमेशा उत्तर दक्षिण की दिशा में लगाते हैं।
-खेती से संबंधित या खेती से जुड़े हुए अन्य बिजनेस को भी बढ़ाया जा सकता है।
-इस प्रकार की खेती से ग्लोबल वार्मिंग तथा क्लाइमेट चेंज के प्रभाव से भी बचा जा सकता है।
No comments:
Post a Comment