Saturday, February 21, 2026
आईपीएम संदेश
हमने प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल ,जमीन, जंगल, जानवर या बायोडायवर्सिटी तथा जीवन के पंचमहाभूत क्षति, जल, पावक ,गगन, समीरा, का दोहन जितना कर सकते थे उतना कर लिया है। जमीन बंजर हो चुकी है तथा जैव विविधता नष्ट हो चुकी है , जमीन की उर्वरा शक्ति भी नष्ट हो रही है। हम कोई अंतिम पीढ़ी के व्यक्ति नहीं हैं। अगर प्राकृतिक संसाधन इसी तरह से खत्म होते रहे तो आने वली पीढ़ियों को रोटी,पानी तथा ऑक्सीजन की भीख मांगनी पड़ेगी। पैसा कोई माने नहीं रखेगा । कागज का नोट तो छापा जा सकता है परंतु पानी ,खाना , ऑक्सीजन नहीं छापी जा सकती । प्राकृतिक संसाधन हमारे माई बाप है जो हमारे जीवन को सुरक्षित एवं संचालित रखते हैं । अतः जीवन को बरकरार रखने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन ना करें। और कृषि तथा अन्य विकास को विनाशकारी ना बनाया जाए तथा कृषि एवं अन्य टेक्नोलॉजी को कृषक, प्रकृति और जीवन हितैषी बनाया जाएं जिससे सुरक्षित भोजन के साथ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सामुदायिक स्वास्थ्य, फसल पारिस्थितिक तंत्र, जैव विविधता , पर्यावरण, जीवन, प्रकृति ,किसान एवं समाज की सुरक्षा हेतु आईपीएम तथा प्राकृतिक खेती अपनाएं । भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं तथा प्रकृति के संसाधनों का संरक्षण करें। इसके लिए वैज्ञानिकों, बुद्ध जीवियों, तथा विकसित कृषकों के द्वारा विकसित की गई विभिन्न प्रकार की कृषि उत्पादन प्रणालियों तथा विचारधाराओं से चयन करके एक प्रकृति व समाज हितैषी समेकित एवं हर प्रकार से लाभकारी विधि को विकसित किया जए ।
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