Sunday, February 22, 2026

जीरो बजट प्राकृतिक खेती-श्री सुभाष पालेकर जी की विचारधारा

जीरो बजट आध्यात्मिक खेती वह प्रणाली है जिसमें मुख्य फसल की लगत का मल अंतर फसलों अथवा इंटरक्रॉपिंग की फसलों से निकलते हैं तथा मुख्य फसल  की उपज को मुनाफे तौर पर लिया जlता है और इसमें बाजार से कोई भी इनपुट नहीं खरीदा जाता है । इनपुट्स अपने घर से प्रयोग करना पड़ता है । इस प्रकार की खेती में मल्टीकपिंग, मल्टीलयर क्रॉपिंग कोबढ़ावा दिया  जाता है तथा जुताई, नीलाई तथा किसी भी खाद का इस्तेमाल बाहरस नहीं किया जाता है। यह खेती सहजीवन के सिद्धांतों पर कार्य करती है । उदाहरण के तौर पर गाने म विभिन्नपकार की फसलें जैसे अरहर, मूंग, हल्दी, आदि फसलें  लगाते  हैं । इसमें गाना 8 फीट की दूरी पर लगाते  है ।
     आध्यात्मिक खेती का मतलब  फसलों की वृद्धि एवं इच्छित उपज  के लिए सारे ससाधन अथवा इनपुट की आपूर्ति केवल प्रकृति करती है।

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