Tuesday, June 23, 2026

Central Plant Protection Organization in India. Recommendations about Woodhead Commission .

 Recommendations of Wood head Commission about Central Plant Protection Organization
The Woodhead Commission (Famine Inquiry Commission, 1944) recommended establishing a central apex body to minimize crop losses and prevent pest-induced food shortages. This led to the creation of the Directorate of Plant Protection, Quarantine and Storage (DPPQS) in 1946 to advise central and state governments on all agricultural plant protection matters. [1, 2, 3]
Key Recommendations & Scope of the Directorate
The Commission envisioned a comprehensive national approach to safeguard agriculture, focusing on three core areas that define the Directorate's mandate today: [1, 2]
  • Plant Quarantine: Regulating the import and export of agricultural commodities. The Commission recognized the need to prevent the introduction and spread of exotic pests, which resulted in the implementation of the Destructive Insects and Pests Act and the Plant Quarantine Order. [1, 2, 3, 4, 5]
  • Locust Control & Research: Establishing dedicated units to conduct surveillance, track migration, and coordinate preventive measures against destructive outbreaks. [1, 2, 3]
  • Integrated Pest Management (IPM): Advising on crop production strategies to reduce yield losses to pests through sustainable, chemical, and biological measures. [1, 2]
Today, this apex organization operates under the Directorate of Plant Protection, Quarantine & Storage (DPPQS), headquartered in Faridabad, Haryana, and functions directly under the Ministry of Agriculture and Farmers Welfare. [1, 2]
Would you like to know more about the current functional activities of the DPPQS, or are you looking for details on the Plant Quarantine Order?
3 May 2024 — Brief History of DPPQ&S. Directorate of Plant Protection Quarantine & Storage (DPPQ&S) was established in the year 1946 on the. recommendation of Woodhead Commi...

Saturday, June 13, 2026

परमाकल्चर Shashwat jeevanshaili शाश्वत /स्थाई जीवन शैली

परमाकल्चर Shashwat jeevanshaili शाश्वत /स्थाई जीवन शैली:-सामुदायिक स्वास्थ्य , पारिस्थितिकतंत्र, जैवविविधता, पर्यावरण, जीवन , प्रकृति और समाज तथा जीवन के पांच महाभूतों, क्षिति ,जल, पावक, गगन, समीरा, खाने योग्य शुद्ध  भोजन के सथ-साथ खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित  करने की जिम्मेदारी  का निर्वहन करते हुए  खेती करना फार्माकल्चर अथवा शाश्वत जीवन शैली  कहलाता है। यह भी एक प्रकार से प्राकृतिक खेती का ही एक  सुधराहुआ   रूप है जिसमें फसल पारिस्थितिकी तंत्र को जंगल की तरह ईस प्रकार से डिजाइन किया जाता है जिससे मानव समाज एवं जीवो को सांस लेने हेतु शुद्ध हवा , खाने योग्य शुद्ध भोजन, पीने के लिए शुद्ध पानी तथा खेती अथवा फसल उत्पादन हेतु उर्वरक भूमि,  भूमि मैं जीवांश कार्बन तथा ह्यूमस तथा सूक्ष्म जीवों की पर्याप्त मात्रा मौजूद हो ।जीवों  से पहले प्रकृति का जन्म हुआ।.प्रकृति में चल रही स्वचालित (Self Organised), स्वयं सक्रिय(Self active), स्वयं पोशी (Self nourished), स्वयं विकाशी(Self developing), स्वयं नियोजित (Self planned), सहजीवी (Symbiotic), एवं आत्मनिर्भर (Self sustained) फसल उत्पादन, फसल रक्षा एवं फसल प्रबंधन पद्धति के आधार पर प्रकृति में प्राकृतिक खेती होती है जिसमें मनुष्य का कोई योगदान नहीं होता है। प्रकृति में चल रही इसी प्राकृतिक खेती की व्यवस्था का अध्ययन करके अब प्राकृतिक खेती को समाज के विकास एवं उत्थान हेतु बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रकृति की समग्रता तथा उसके स्वरूप को बचाते हुए अथवा उसकी रक्षा करते हुए स्वयं का ज्ञान तथा समझ को इस्तेमाल करते हुए खेती करना ही प्राकृतिक खेती है। फसलों का भोजन जीवाश्म अथवा माइक्रोऑर्गेनाइज्म आदी की डेड इकाइयां हैं जिसे हमास कहते हैं।

 2.    प्राकृतिक खेती आईपीएम का ही एक सुधरा 
हुआ रूप है जिसमें फसलों के उत्पादन एवं फसलों की रक्षा हेतु रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है तथा भूमि की उर्वरा शक्ति ,खेतों की जैव विविधता ,जमीन में जैविक कार्बन की मात्रा तथा ह्यूमस तथा इसको जमीन में बनाने सूक्ष्मजीव और सूक्ष्म तत्व ऑन ,जमीन में भूमि जल स्तर को ऊपर लाने वाले प्रयासों तथा वर्षा जल संचयन के प्रयासों को बढ़ावा देकर तथा देसी गायों ,फसलों के देशी बीजों की प्रजातियां को संरक्षित करते हुए, गायों के मूत्र एवं गोबर के प्रयोग को शामिल करते हुए तथा देशी बीजों को प्रयोग को फसल उत्पादन में बढ़ावा देते हुए उचित तथा लाभकारी एकल फसल चक्र पद्धति के स्थान पर बहू फसली खेती की फसल चक्र को अपना कर नवीन  विधियों के साथ-साथ पारंपरिक विधियों को शामिल करते हुए कृषक परिवारों जिसमें जानवर भी शामिल है समाज ,सरकार और बाजार की जरूरत के हिसाब से फसलों का नियोजन अथवा चयन करते हुए ,स्वस्थ समाज की कामना करते हुए ,कम से कम खर्चे में अथवा शून्य लागत पर जो खेती की जाती है उसे ही प्राकृतिक खेती कहते हैं यह खेती देसी बीजों, देसी गाय, देसी केंचुआ, देसी पद्धतियों, देसी गाय के मल मूत्र एवं गोबर के प्रयोग पर आधारित इनपुट तथा देसी परंपराओं पर आधारित खेती करने का तरीका है।
जीवन शैली को स्थायित्व प्रदान करना अथवा जीवन शैली को शाश्वत बनाना ही फर्माकल्चर अथवा शाश्वत जीवन शैली कहते हैं। फार्माकल्चर अथवा शाश्वत जीवन शैली जंगल के सिद्धांतों पर आधारित है। जिसमें मानव का हस्ताक्षऐप बिल्कुल नहीं किया जाता है।
No management is the best management.
प्रबंधनन न करना ही उत्तम प्रबंधन  है।
पेड़ लगाना, पेड़ों को वृक्षों  में परिवर्तित करना, तथा  रसायन रहित फलों का उत्पादन करना करन एक सोच  मैं परिवर्तन का तरीका है। इस प्रकार की सोच को विकसित करना ही परमकल्चर  का मुख्य उदश्य है। सुबह से शाम तक किए जाने वले कार्यों को जीवन विधान कहते हैं। लोगों को लोगों के साथ तथा प्रकृति के साथ कनेक्ट करना  या जुड़ाव करना ही जीवन विधान है।
Climate change is not only environmental issue but also it is a survival issue.
Let's make more and more jungle or forests to conserve and survive  wild life fauna and flora.
We are taking many things from nature and not giving any thing to nature.
शरीर से शिव गया तो शव बन गया।
लेट्स सेव नेचर। वाट वे आर्डपिंग तो सेव नेचर।
लेट्स स्टॉप कल्चर ऑफ  एंड थ्रो।
किसान हमारी  मूलभूत नर्स हैं।
पैसे के  लालच में हमने खेती मैं   यंत्रों एवं रसायनों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया  जिसके बहुत सारे दुष्परिणाम सामने आने लगे।
प्रकृति में बदलाव लाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है बल्कि हमारी भी है । हमें अपनी जम्मेदारी लेनी होगी और हवा,पानी,खाना,अनाज,O2 को आगे आने वाली पीढियां के लिए बचाना होगा  और यह सलाह  दूसरों को भी देनीचहिय और धीरे धीरे परिवर्तन लाना चाहिए़। मिट्टी की उर्वरा शक्ति बचाना चाहिए़। तथा कचरे को कंपोस्ट में बदलना चाहिए। धीरे धीरे  यह अभियान मै बदल जाएगा।
जीवन , प्रकृति, पारिस्थितिकतत्र, जैवविविधता , के सरक्षण एवं  सुधार  हेतु  जिम्मेदारी लेते हुए  खेती करना  ही परम कलचर अथवा शाश्वत जीवनशैली कहलाता है। फार्माकल्चर के द्वारा खेती करने हेतु जमीन को उर्वरक बनना तथा फसल पारिस्थितिक तंत्र को सक्रिय बनाना अति आवश्य क है जिससे कम से कम पानी तथा कम से कम खाद  जो खेत के द्वारा खेत मैं ही बनाई जाती है से  खेती की जा सकती है। Nature has a self sustained management system.
फॉरेस्ट। 

आवश्यकता से ही विकास होता  है  और विकास को कभी विनाशकारी नहीं बनने देना चहिए । प्रकृति हितैषी सोच विकसित करना तथा उसको  प्रकृति के हित में ही इस्तेमाल करना ही परम कल्चर कहलाता ही।
जीवन स्थाई नहीं हो सकता परंतु जीवन शैली स्थाई  हो  सकती है।
अभी तक जो हो गया सो हो गया अब आगे के लिए अच्छा होना चाहिए यही फार्माकल्चर का उद्देश्य है  । मशीन तथा अन्य रसायनिक
 अथवा गैर रासायनिक इनपुट से ऊपर उठकर भाव एवं रिश्ता 
लाभ से जायदा  स्वास्थ्य की जरूरत है।
कृषकों के साथ उपभोक्ता को जागरूकता की जरूरत है।
किसान एवं उपभोक्ता  के बीच सूचनाओं का आदान प्रदान होना चाहिय।
खेती को बिचौलियों से मुक्त  होना चाहिए़।
निरीक्षण की साझी होनी चाहिए़ ।
मंडी मैं ऑर्गेनिक कृषि उत्पादों  के लिय कोई स्पेशल  काउंटर नहीं होता है। 
किसानों को फार्मर्स प्रोड्यूसर कोई  कंपनी  होनी  चाहिय।
जहां चाह वहां रह के सिद्धांत को मन कर प्राकृतिक खेती अथवा  परमकल्चर क्रियान्वन करना चाहिए।
To bring Ecology,economy and Agriculture together and to sustain it at self sufficiency level to maintain balance among  life,nature  and society. Permaculture is also is a liability and responsibility. W have to fulfill it.

Monday, June 8, 2026

Niti Aayog ke Anusar Prakritik kheti ki paribhasha.

 नीति आयोग के अनुसार प्राकृतिक खेती   एक रसायन मुक्त पारंपरिक कृषि पद्धति है। यह कृषिपैरिसस्थितिकई अथवा एग्रो इकोसिस्टम अथवा एग्रो इकोसिस्टम पर आधारित एक हा कृषि प्रणाली है जो फसलों, पेड़ों,और पशु धन का एक साथ एकीकृत करती है।

Wednesday, June 3, 2026

दिमाग की गिजा हो या  गिजाऐ  जिस्मानी
यहां  तो हर गिजा मैं मिलावट मिलती है ।

रसायनिक   खेती  हो या खेती(कीटों ) के रसायन
 इनमें हर चीज़ में मिलावट मिलती है ।
 किसानों करो ना प्रयोग रसायन इनसे सेहद बहुत बिगड़ती 
इनसे सेहद बहुत बिगड़ती ,खेतों की मिट्टी बंजर पड़ती   अरे किसानों खेतों मैं  करो न प्रयोग रसायन इनसे सेहाद बहुत  बिगड़ती। 
इनसे जैवविविधता मरती ,मिट्टी मैं ऑर्गेनिक  कार्बन घटता किसानो करो न प्रयोग रसायन इनसे  इनसे शहदबहुत बिगड़ती।
अरे शहद बहुत बिगड़ती फसलों मैं कीटों की समस्याएं और बढ़ती  ,अरे किसानों करो न प्रयोग रसायन  इंसेसहाद बहुत बिगड़ती।
सेहद बहुत बिगड़ती  किसानों की आमदनी (इनकम ) है घटती ।अरे किसानों करो न प्रयोग रसायन इनसे सेहद  बहुत बिगड़ती 
सेहद बहुत बिगड़ती खेतों में मधुमक्खी तितलियां घटती फसलों की उपज बहुतकम हो जय  इनसे  सेहद बहुत बिगड़ती  ।किसानों करो ना प्रयोग  रसायन  इनसे सेहद बहुत बिगड़ती।
सेहद  बहुत बिगड़ती भोजन  जहरीला हो जावे 
परिवार  पड़  जावे बीमार  भैया  सेहद बहुत बिगड़ती।
आई पी एम तुम अपनाओ भरपूर और स्वस्थ फसल तुम पाओ भोजन के भरे रहे हैं भंडार इससे सेहत कभी ना बिगड़ी।