Thursday, July 9, 2026

आज के परिदृश्य में खेती में वंचित परिवर्तन

आज के परिदृश्य में खेती में विभिन्न प्रकार के परिवर्तनों की आवश्यकता  है। अभी तक हम लागत पर आधारित खेती को प्रमुखता दे रहे थे जिससे खेती में  लगत तो बड़ गई परंतु उपज नहीं बढ़ी।अब  लागत आधारित खेती  कa सफर पूरा हुआ।अब खेती को व्यवसाय ,समाज  सहकारिता एवं युवाओं  पर आधारित  खेती की आवश्यकता प्रतीत हो रही है। अब इनपुट आधारित कृषि का सफर पूरा हुआ। अब कृषि  शोध कार्य ,शिक्षा, तथा सहकारिता  तथा उत्पादन प्रबंधन  आधारित  खेती की जरूरत महसूस हो रही दै।इसके अतिरिक्त आज की  खेती  इकोलॉजी,इकॉनमी तथा रिजल्ट आधारित शोध पर आधारित  होनी चाहिय।
व्यवसाय  मतलब उत्पादन का    प्रबंधन,गुणवत्ता का प्रमाणि      कारण एवं  विपणन  पर आधारित शोध कार्य पर  आधारित  खेती की जरूरत है। गाँव कासम गांव मैं पहले बिकेगा  तथा  बच हुआ  सामान शहर में बेच जाएगा।
2, प्रकृतिक की  व्यवस्था को समझ कर खेती की जय न की प्रकृति की व्यवस्था के समांतर दूसरी व्यवस्था खड़ी कर के खेती की जय। खेती में बदलाव सिर्फ खेत के आधार पर मत करो पंक्ति पूरे कृषितंत्र के आधार पर करो।
3ध्यान रहे कि खेत मैं ही खाद बनती है। खेत मैं ही प्रबंधन होता हैऔर खेत में ही उत्पादन होता है।
4,प्रकृति मै  नियम नियंत्रण और प्रबंधन की पद्धति चलती है।
5 हमारी खेती मार्केट हाईजैक करली और किसानों को पता भी नहीं चल। 
6 कृषि मैं लाभ से जायदा स्वास्थ्य की जरूरत है। बाजार आधारित खेती ने ही  उत्पादन खर्च बढ़ाया।
7, रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से जमीन के ऊपर एवं नीचे पाई जाने वली जैवविविधता नष्ट हो जाने से जमीन मैं जीवाश्म कार्बन घटाने से जमीन की उर्वरा शक्ति घट गई जिसे पुनः बढ़ाना पड़ेगा।इसके लिय जमीन मै जीवाश्म कार्बन की मातृबाधना पड़ेगा। इसके लिय ग्रीन मैन्यूरिंग  ,गोबर की खाद ,फसलों के अवशेष  को खेतों में डालनपडेगा। खेतों की उर्वरता धीरे धीरे बढ़ सकेगी।
8फसल विविधता  प्राकृतिक खेती  की एक प्रमुख गतिविधि है।