Friday, July 10, 2026

आईपीएम के कुछ सॉल्यूशंस

1, आप कीट  अथवा नशीजीवों को ना छेड़ो  कीट अथवा नशीजीव आपको नहीं छेड़ेगा । जिस नाशी जीव को हम मारते हैं वही नासि जीव हमारी फसल में महामारी के रूप में उभरेगा ।
2,Aphid अथवा  चैंपा एक सप्ताह में 85 गुना बढ़ता है। 
3, लेडी बर्ड बीटल, सिरफिड  फ्लाई, विभिन्नपरकार की spiders,एफिडियस, क्रिसॉपरला, विभिन्न परकार के पर भक्षी एवं परजीवी किट, डिफरेंट टाइप्स ऑफ इंसेक्ट पैथोजेंस , आदि जैव नियंत्रण कारक विभिन्न प्रकार के नासिजीवों की संख्या का प्रबंधन करने में सहायक होतेहैं।
4 आप कीटों को समझने की कोशिश करें ।26 कीटों की जानकारी अगर किशआनों  को है तो वे खेतों में  जहर नहीं डालें।
5 मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने से मिट्टी की वाटर होल्डिंग कैपेसिटी बढ़ायेगी ।

6, विभिन्नपकार के ट्रैप्स को इस्तेमाल करना चाहिय।
7 खेतों मैं  जीवामृत डालना चाहिए।
7ओपन ग्रेजिंग ऑफ कैटल्स।
8 टर्मिट इस नूतन एनिमी।
9 संतुलित खादों का उपयोग। तथा संतुलित सीड रेट।

Thursday, July 9, 2026

आज के परिदृश्य में खेती में वांछित परिवर्तन

आज के परिदृश्य में खेती में विभिन्न प्रकार के परिवर्तनों की आवश्यकता  है। अभी तक हम लागत पर आधारित खेती को प्रमुखता दे रहे थे जिससे खेती में  लगत तो बड़ गई परंतु उपज नहीं बढ़ी।अब  लागत आधारित खेती  कa सफर पूरा हुआ।अब खेती को व्यवसाय ,समाज  सहकारिता एवं युवाओं  पर आधारित  खेती की आवश्यकता प्रतीत हो रही है। अब इनपुट आधारित कृषि का सफर पूरा हुआ। अब कृषि  शोध कार्य ,शिक्षा, तथा सहकारिता  तथा उत्पादन प्रबंधन  आधारित  खेती की जरूरत महसूस हो रही दै।इसके अतिरिक्त आज की  खेती  इकोलॉजी,इकॉनमी तथा रिजल्ट आधारित शोध पर आधारित  होनी चाहिय।
व्यवसाय  मतलब उत्पादन का    प्रबंधन,गुणवत्ता का प्रमाणि      कारण एवं  विपणन  पर आधारित शोध कार्य पर  आधारित  खेती की जरूरत है। गाँव का माल गांव मैं पहले बिकेगा  तथा  बचा हुआ  सामान शहर में बेचा जाएगा।
2, प्रकृति की  व्यवस्था को समझ कर खेती की जय ना की प्रकृति की व्यवस्था के समांतर दूसरी व्यवस्था खड़ी कर के खेती की जाय । खेती में बदलाव सिर्फ खेत के आधार पर मत करो बल्कि पूरे कृषितंत्र के आधार पर करो।
3 ध्यान रहे कि खेत मैं ही खाद बनती है। खेत मैं ही प्रबंधन होता हैऔर खेत में ही उत्पादन होता है।
4,प्रकृति मै  नियम ,नियंत्रण और प्रबंधन की पद्धति चलती है।
5 हमारी खेती मार्केट ने हाईजैक करली और किसानों को पता भी नहीं चला। 
6 कृषि मैं लाभ से जायदा स्वास्थ्य की जरूरत है। बाजार आधारित खेती ने ही  उत्पादन खर्च बढ़ाया।
7, रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से जमीन के ऊपर एवं नीचे पाई जाने वली जैवविविधता नष्ट हो जाने से जमीन मैं 
जीवाश्म कार्बन घटने से जमीन की उर्वरा शक्ति घट गई जिसे पुनः बढ़ाना पड़ेगा।इसके लिय जमीन मै जीवाश्म कार्बन की माट्रा बाधना पड़ेगा। इसके लिय ग्रीन मैन्यूरिंग  ,गोबर की खाद ,फसलों के अवशेष  को खेतों में डालना पडेगा। खेतों की उर्वरता धीरे धीरे बढ़ सकेगी।
8 फसल विविधता  प्राकृतिक खेती  की एक प्रमुख गतिविधि है।