फसलों को जीवांश की जरूरत होती है। जीवांश विभिन्न पकार फसलों के अवशेषों तथा जीवों के मल मूत्र आदि को जमीन अथवा खेतों में डालने से जीवाणुओं ki क्रिया के द्वरा ह्यूमस केरूप में बनता है जो भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ात है। अतः भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए खेतों में जीवो का मल मत्र तथा फसलों के अवशेष आदि डालने चहिए ।
हमें प्राकृतिक खेती ही करनी चाहिए और रसायनों के उपयोग को खेती मैं बिल्कुल ही बंद करनाचहिए । क्योंकि रसायनऑन के अवशेष खाद्य श्रृंखला केद हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं और हमें बीमारियां देते हैं। इस प्रकार से रासायनिकद्वारा विषाक्त भोजन मिलता है। हमारे आगे आने वाली पीढियां को तो यह भी नसीब नहीं होगा क्योंकि रसायनों के उपयोग से जमीन मेंपाए जान वाले उपयोगी जवाणु जो हमस का निर्माण करते ह खत्म होने की कगार पर हैं ।
जमीन को जिंदा करदो इतना सा विज्ञान है प्राकृतिक खेती का । जमीन में जीवाणुओं की वापसी करनa ही प्राकृतिक खेती का तरीकa है।
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