Ratio, खाद्य, पोषण,स्वास्थ्य तथा पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी हुई विभिन्न सुरक्षाओं, समस्याओं एवं मुद्दों को भी शमिल किया गया। इसके अतिरिक्त कृषकों की आमदनी, आदिसे जुड़े हुए मुद्दों को भी शामिल कर लिया गया। कृषि अथवा खेती का मुख्यउद्देश्य सर्वे भवंतु सुखना सर्वेसतु निरामया है अर्थात सभी प्राणी सुखी हों एवं निरोगी हो। इसके साथ-साथ खेती की विभिन्न प्रकार की प्रणालीयों को प्रकृति की व्यवस्था से जोड़ कर प्राकृतिक खेती के रूप में परिवर्तित कर दिया गया । यद्यपि 1993 के दरान इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट को प्राकृतिक फसल सुरक्षा के नाम मैं बदल दिया गया था जो बाद फिर से आईपीएम के नाम से जाना जाने लगा।
Saturday, March 28, 2026
इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आई पी एम) विचारधारा में बदलाव
प्रारंभिक तौर पर इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट अर्थात आईपीएम की शुरुआत आईपीएम फॉर बेटर एनवायरनमेंट अर्थात उत्तम पर्यावरण हेतु आईपीएम अपनाये के नारे के साथ हुई थी ( 1991 ,-1992,,)तथा आईपीएम की की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 22 राज्यों में 26 केंद्रीय एकीकृत नासिक जीव प्रबंधन केंद्र स्थापित किए गए जिनकी संख्या बादमें 35 हो गई और अब यह संख्या 11 लोकस्ट वार्निंग आर्गेनाइजेशन के केंटो को मिलाकर तथा दो नए के दो कई मिलकर 48 हो गई है । आईपीएम में आईपीएम में सामुदायिक स्वास्थ्य, इकोसिस्टम, पर्यावरण, जैव,विधता, जीवन और उसके पंच महाभूत क्षिति, जल , पावक, गगन, समीरा तथा प्रकृति और उसके ससाधनों, समाज और उससे जुड़े हुए विभिन्न मद्दों, तथा खेती के क्रियान्वयन हेतु प्रयोग किए जानेवाले विभिन्न प्रकार की विचारधाराओं एवं रसायन रहित खाने योग्य सुरक्षित कृषि उत्पादों के उत्पादन की सपूर्ण पद्धति, उनका वैल्यूएडशन, गुणवत्ता नियंत्रण, सर्टिफिकेशन, लाइसेंसिंग,पैकेजिंग, विपणन एवं व्यापार, कॉस्ट बेनिफिट
Thursday, March 26, 2026
रासायनिक खेती के दुष्परिणाम
1, फसल उत्पादन लागत का बढ़ जाना।
2, उत्पादन लगभग स्थिर हो गया ।
3, गांव के युवा बे रोजगार घूम रहे हैं ।
4, किसान कर्जदार हो गया ।
5, जमीन में जीवांशकर्बन लगभग 0,3 प्रतिशत रह गया है जिस जमीन की उर्वरा शक्ति घट गई । यह कार्बन करीब एक प्रतिशत। होना चाहिए़ ।
6, बायोडायवर्सिटी नष्ट ह गई। बहुत सारेजव जंतु विलुप्त हो गए ।
7, भोजन स्तर नीचे चला गया ।
8, किसने की आत्महत्या बढ़ गई ।
9, भोजन, पानी, सब्जियां तथा फल, पशुओं का चारा तथा दूध आदिवो सीसी हो गए । जिनवा कीटनाशकों के अवशेष मिलने लगे ।
10, जलाशय खत्म हो गई।
11, भूमि की संरचना खराब हो गई । जमीन बंजर हो गई।
12, मनो क्रॉपिंग से भोजन सिर्फ 6 फसलों तक ही सीमित रह गया यह फसल है गहूं
चावल मक्का और गन्ना1
13 भोजन की पौष्टिकता खत्म हो गई ।
14 जल ,जमीन ,जंगल, जानवर, एवं जन सभी प्रभावित हुए ।
15, विभिन्नपकार की बीमारियां मनुष्य तथा जानवरों म
आनेलगीं ।
16, मनुष्य महार्मोंस डिसऑर्डर के प्रभाव दिखाईद।
ने लगे ।
17,ज्यादा उत्पादन के बावजूद फसल उत्पादों का विक्रय मूल्य काम मिल रहाह ।
18, 1 किलो गेहूं से 900ग्राम दलिय गेहूं की कपनियां अथवा व्यापारी सुखी उनकी हैं उनकी आमदनी किसानों से अधिकह जब की किसान गेहूं के एक दाने से 1 किलो अनाज पैदा करता है। और वह कर्जदार है और उसे कैबरा आत्महत्या करना पड़ता है ।
19। क्लाइमेट चेंज अथवा मौसा म मै बदलाव , तप क्रम में बढ़ोतरी, सुखआ तथा बाढ़ की समस्या ।
20 नए-नए कीड़े तथा बीमारियों का प्रकोप।
21, कीटों में नासि जीव नाशकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता का विकसित होना।
22 विभिन्न राशि जीव अश्कों की संख्या में अचानक वृद्धि हो जना । लाभदायक जीवन की संख्या में कमी आ जाना ।
।
Saturday, March 21, 2026
खेती एक संपूर्ण योजना तथा तंत्र है Farming is a complete planning and system as per need of nature and society .
𝗙𝗮𝗿𝗺𝗶𝗻𝗴
IPM and Farming is a complete planning and system of doing crop production,protection and it's ,management right from production, processing,packaging, Certification,branding and also up to the marketing to make farming profession profitable to the Farmers and and favourable for climate ,weather, and nature to avoid adverse effects of chemicals and wrong agricultural practicess on nature and so ciety.
खेती फसल उत्पादन की फसल उत्पादन से लेकर, प्रोसेसिंग अथवा संस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, प्रमाणीकरण, एवं मार्केटिंग अथवा विपणन तक की एक संपूर्ण योजना है जो सिर्फ लागत पर आधारित ना होकर प्रकृति के संपूर्ण सिद्धांतों पर आधारित है ।यह आर्थिक दृष्टिकोण से लाभकारी एवं स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से प्रकृति और समाज के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होनी चहिए। मिश्रित खेती एवं बहुस्तरीय तरीके से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
एक खेत फसल अनेक, बीज एक उत्पादन अनेक, पौधा एक उत्पादन वर्ष अनेक । अनेक प्रकार के पौधों तथा प्रकृति के साथ सहअस्तित्व, पूरकता, स्थानीयता, एवं समृद्धि के सिद्धांत केसाथ साथ प्रकृति में पाए जाने वाले नियम , नियंत्रण एवम संतुलन के सिद्धांत के अनुसार खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
Many crops in a single field.
More production from a single seed.
Production up to many years from a single plant.
Coexixtence among nature ,different types of plants.
Vocal for local.
Prosperity among the Farmers.
Nature has rule ,control and balance.
Multicropping and production density iis the need of the hour.
Friday, March 20, 2026
आईपीएम तथा प्राकृतिक खेती के कुछ मूल मंत्र/, खेती का प्राकृतिक विज्ञान
1 खेती करते समय हमें यहसोचना पड़ेगा की हमे जिंदगी बचाना है या नशिजीवनाशकों को बचना है।
2, रासायनिक नासि जीव नाशक एवं उर्वरक कृषि संस्कृति की परंपरा में कभी भी शामिल नहीं थे।
3,Food security along with food ,socialand ecological safety is the main objective of IPM and Natural Farming.
4, प्राकृतिक खेती सुरक्षित भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य का आधार है।
5,ह्यूमन हेल्थ,प्लांट हेल्थanimal health,and soil health must be considered with a single eyeor all together to implement IPM and Natural farming.
6, खाने योग्य सुरक्षित भोजन के साथ खाद्य सुरक्षा, पोषण एवं इकोलॉजिकल सुरक्षा अथवा पारिस्थितिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना आईपीएम तथा प्राकृतिक खेती का प्रमुख उद्देश्य है।
7, प्रकृतिक के सिद्धांतों पर विज्ञान को विकसित करें।
8, खेती विरोध करने का विषय नहीं है बल्कि यह समीक्षा करने का विषय है।
9, खेती भारतीय संस्कृतिकएक सम्मानजनक काम रहा है।
उत्तम खेती माध्यम बान
निकृष्ट चाकरी भिखनिदान
10, पौधोंमे एक दूसरे को पोषण का नियम, पूरकता ही उर्वरकता है, जीवजतु, पशु पक्षियों तथा वनस्पतियों के बीच परस्पर में संबंध का नियम काम करता है जो खेती करने मैं सहायक होता है।
11, खेत एक फसल अनेक
बीज एक उत्पादन अनेक
पौधा एक उत्पादन वर्ष अनेक
हर पौधे में गुणात्मक उत्पादन ही प्राकृतिक खेती के सिद्धांत हैं।
12, खेती की उर्वरा शक्ति के पोषक रस को खेतोंमे ही बनाया जाए तथा जैव विविधता एवं प्रकृति के ससाधनों तथा जीवन के पंच महाभूत का संरक्षण करें।
13, प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक खेती सह अस्तित्व एवं स्थानीयता के सिद्धांत पर आधारित है।
14, समृद्धि ही खेती का मूल मंत्र है।
15, खेती में बाहरी खाद की आवश्यकता नहींहती है। क्योंकि खेत में खाद बनाने की समर्थ होती है। जमीन अपने उर्वरता के आधार पर खाद बनती है।
16, हरित क्रांति में प्रकृतिक को जानकारी दिया गया तथा बाजार आधारित इनपुट्स को वरीयता दी गई थी जिससे उत्पादन लागत में वृद्धि हुई ।
17, प्रकृति में नियम भी है, नियंत्रण भी है, और संतुलन भी है। प्राकृतिक खेती में कृत्रिमिता की जगह प्रकट की व्यवस्था को समझें ।
18, सामुदायिक स्वास्थ्य, पर्यावरण, पारिस्थितिकतत्र, जैववविधता,भूमि, जल अग्नि आकाशसमीरा अथवा वायु का संरक्षण करते हुए कम से कम खर्चे में, जीवन प्रकृति और समाज को कम से कमबधित करते हुए जब वनस्पति संरक्षण किया जाता हैतभी हम उसको आईपीएम कहते हैं।
19, आई पी एम नाशीजीव प्रबंधन सहित संपूर्ण कृषि तंत्र अथवा पद्धति का एक समेकित प्रबंधन की विचारधारा है।
20,There is no culture better than Agriculture.
कृषि से उत्तम कोई भी संस्कृति नहीं है।
21, खेतों के अंदर बाहर घूम कर एवं बैठकर देखें, पौधों से बात करें और अपनी खेती के विकास के लिए सोचऐं ।
22, खेती में मानसिकता के बदलाव की जरूरत है। रसायनों के उपयोग को बंद करें तथा प्रकृति और उसकीववस्था के आधार पर खेती करें । बाजार के इनपुट एस को बंद करें। खेती जीवन एवं परिवार का विषय है खेती व्यवहार एवं सहकारिता तथा सहयोग का विषय है।
23 किसानों का एक ही धर्म है वह खेती ।
Sunday, March 15, 2026
इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आईपीएम)
इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आईपीएम)
1,आईपीएम एक प्रकार का सामाजिक आंदोलन है जिसका उद्देश्य कम से कम खर्चे में, रसायनों का कम से कम उपयोग करते हुए तथा जीवन, जलवायु ,पर्यावरण ,जैव विविधता, फसल पारिस्थितिक तंत्र, प्रकृति और समाज को कम से कम बाधित करते हुए फसल उत्पादन ,फसल रक्षा तथा नाशिजीव प्रबंधन की सभी विधियों को समेकित रूप से प्रयोग करते हुए जिसमें रासायनिक विधियों का उपयोग सिर्फ किसी आपातकालीन स्थिति के निदान हेतु अंतिम विकल्प के रूप में प्रयोग करते हुए फसल पारिस्थितिक तंत्र में पाए जाने वाले हानिकारक जीवों की संख्या को आर्थिक हानी स्टार के नीचे सीमित रखते हुए खाने के योग्य सुरक्षित भोजनके साथ खाद्य सुरक्षा , जीवन तथा इकोलॉजिकल सुरक्षा अर्थात पारिस्थितिकतंत्रीय एवं पर्यावरण सुरक्षा के साथ साथ व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कषि उत्पादों का उत्पादन किया जाता है तथा उत्पादों के अधिकतम विक्रय मूल्य की अपेक्षा की जाती है आईपीएम कहलाता है।
2, आईपीएम-नासिजीव प्रबंधन सहित संपूर्ण कृषि तंत्र अथवा पद्धति के समेकित प्रबंधन की एक विचारधारा है जिसमें खाने के योग्य सुरक्षित तथा व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन कम से कम खर्च तथा जन ,जमीन, जंगल, जलवायु, जानवर, जैव विविधता, पर्यावरण, तथा पकृति के संसाधनों एवं जीवन के पांच महाभूतों का संरक्षण करते हुए एवं समाज को कम से कम बाधित करतेहुए खेती की जाती है अथवा नाशिजीव प्रबंधन किया जाता है आईपीएम कहलाता है। आईपीएम के क्रियान्वयन हेतु नासिजीव प्रबंधन की सभी विधियों को समेकित रूप से प्रयोग किया जाता है तथा रसायनों का प्रयोग दी गई संस्तुति के अनुसार अंतिम विकल्प के रूमें किया जाता है।
3,IPM is a social movement to reduce the use of chemicals in agriculture and to maintain harmony with nature and society.
4,Suppression of pest population by any meanse to a level at which the harm due to pest become minimum, insignificant or minor is called pest management. When more than one methods are used to suppress the pest population below ETL is called as Integrated Pest Management (,IPM)¡
5The minimum pest population above which the adoption of pest management methods is recmmonded or suggested is called as Economic Thrshold level.
6,To get rid of from pest problem with minimum expenditure, minimum use of chemicals and least disurbance to l community health,ife , environment,ecosystem ,biodiversity,nature and it's resources , and society ithrough adoption of all available, affordable, and feasible methods of pest management is to suppress the pest population below ETL is called as IPM.
7,IPM is an integrated management of complete Agricultural System including Pest management.
आईपीएम-नाशीजीव प्रबंधन सहित संपूर्ण कृषि तंत्र अथवा पद्धति के समेकित प्रबंधन की एक विचारधारा
Monday, March 9, 2026
Integrated Pest Management (IPM)
Integrated Pest Management (IPM)
एकीकृत नाशिजीव प्रबंधन
Of the Farmers, By the Farmers ,For the Farmers
किसानों का, किसानों के द्वारा, किसानों के लिए
Of The People,By the People,For the People.
लोगों का, लोगों के द्वारा, लोगों के लिए
Sunday, March 8, 2026
आई पी एम तथा अन्य रसायन रहित खेती को बढ़ावा देने के लिए कुछ बाधाएं
आईपीएम -नाशिजीव प्रबंधन सहित संपूर्ण कृषि तंत्र अथवा पद्धति के समेकित प्रबंधन की एक विचारधारा है जिसमें खाने के योग्य सुरक्षित तथा व्यापार हेतु गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन कम से कम खर्च तथा जन, जमीन, जंगल, जलवायु, जानवर,जैव विविधता, जन, पर्यावरण,, तथा प्रकृति के ससाधनों तथा जीवन के पंचमहाभूत का संरक्षण करते हुए एवं समाज को कम से कम बाधित करते हुए खेती की जाती है अथवा नाशीजीव प्रबंधन किया जाता है आईपीएम कहलाता है। आईपीएम के क्रियान्वयन हेतु रसायनों का दी गई संस्कृति के हिसाब से अंतिम विकल्प के रूप में किया जाता है।
विभिन्न वैज्ञानिकों, कृषि प्रचार एवं प्रसार कार्यकर्ताओं, बुद्ध जीवियों तथा प्रगतिशील किसानों के द्वारा विकसित की गई विभिन्न तरह की खेती की पद्धतियों में से सुरक्षित विधियों को अपनाकर एक उपयुक्त रणनीति अपना कर सुरक्षित भोजन के साथ साथ खाद्यसरक्षा को सुनिश्चित किया जाता है इसी को आईपीएम कहते हैं। आईपीएम के क्रियान्वयन हेतु विभिन्न प्रकार की बाधाएं इस प्रकार हैं।
1, किसानों के द्वार पर आईपीएम तथा प्राकृतिक खेती के इनपुट्स की अनु उपलब्धता ।
2, आई पी एम तथा प्राकृतिक खेती के इनपुट के उत्पादन हेतु उद्यमियों मै आईपीएम इनपुट की लॉन्चिविटी कम होने की वजह से आईपीएम इनपुट्सक उत्पादन हेतुरुचि न होना।
3, गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन न करपाना।
4, कृषि उत्पादों के उपभोक्ताओं मैं इस प्रकार की जानकारी की रसायनों के प्रयोग से उत्पादित कृषि उत्पादों में रसायनों के जहरीलेअवशेष अवशेष पाए जाते हैं जिससे कृषि उत्पादन विषाक्त हो चुके हैं जो भोजन श्रृंखला के द्वारा हमारे शरीर मैं पहुंच कर एकत्रित होने पर विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न करते हैं के बारे मैं जागरूकता बढ़ानी चाहिए।अतः हमें इन पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
5, कृषि उत्पादों के विपणनहेत बंजारों की अनु उपलब्धता।
6, कृषि उत्पादों का कभी-कभी उत्पादन लागत से भी कम विक्रय मल्य मिलना।
7, कृषि उत्पादों की गणवत्ताको तथा उपभोक्ता का भरोसा बरकरार रखना ।
8, रासायनिक कीटनाशकों तथा उर्वरकों की उत्पादन कंपनियो का परोक्ष रूप में विरोध
9, सरकारी कर्मचारियों का रसायनमुक्त विधियों के प्रचार एवं प्रसार में रुचि ना लेना ।
10, रासायनिक कीटनाशक किसानों के घर पर न बनने की वजह से उनका उत्पादन कंपनियों में किया जाता है वहां पर उनकी गुणवत्ता का भरोसा नहीं किया जा सकता।
11, रासायनिक कीटनाशकों का फ्रिक्वेंट पंजीकरण करना ।
12, रासायनिक कीटनाशकों का टीवी द्वारा प्रचार करना ।
13, ऑर्गेनिक फार्मिंग में बहुत बड़ा झोल है
14, किसानों के आय बढ़ाने की बात की जाती है परंतु उनके कृषि उत्पादों के उत्पादन के बढ़ाने की तथा उसके गुणवत्ता की और ध्यान नहीं दिया जाता है।
15, किसान हितैषी नीतियों का ना होना।
16, कृषि उत्पादोंकआ लाभदायक मूल्य का न मिलना।
17, किसान पैसे देकर जहर खरीद रहा है और उसे लापरवाही से प्रयोग कर रहा है इस और ध्यान नहीं दिया जा रहा ।
18, मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जैव विविधता जीवांशकर्बन प्राकृतिक संसाधनों था जीवन के पंचमहाभूत के संरक्षण ह ध्यान ना देना।
18, मल्टीकपिंग, इकोलॉजिकल इंजीनियरिंग,अंतर फसलों तथा बॉर्डर फसलों का लाभदायक कीट ऑन के संरक्षण हेतु ना लगाना ।
19, रसायन रहित खेती की विधियों को बढ़ावा दने, प्रकृति के वैभव को बढने, पर्यावरण प्रदूषण को घटाना, जैव विविधता तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए दो किसान भाई काम करते हैं तथा समाजिकउ स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं उनकोप्रोत्साहन हेतु कुछ न कुछ अनुदान अवश्य मिलना चाहिए जैसे रासायनिकफर्टिलाइजर्स की खरीद पर किसानों को अनुदान मिलता है ।
20 किसानों को रासायनिक कटनाशकों के
अंधाधुंध प्रयोग को न करने के लिए जागरूक करना चाहिए 21, मशीनरीकरण से कृषकों ने पशुओं तथा जानवरों को पालना कम कर दिया है जिससे उनसे उत्सर्जित गोबर अथवा कार्बनिक पदार्थ जो जमीन में डाला जाता था और उसकोजमीन मैं पाए जाने वाले जीवाणु अपनेभीजन के के रूप में खाते थे और उससे ह्यूमस बनता था जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती थी यह कार्य अब नहीं होता है ।इसलिए किसानों को पशुओं को पालना चाहिए़ ।
22, प्राकृतिकखेती के इनपुट्स तथा विधियों को आईपीएम में शामिल करना चाहिए।
23, खेतों के चारों तरफ मेड तथा मेड पर पेड़ लगाने चाहिए जो पक्षियों के लिए बैठकों की तरह प्रयोग किया जाते हैं और ये पक्षी कीटों के नियंत्रण में पाना योगदान देते हैं।
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