2, उत्पादन लगभग स्थिर हो गया ।
3, गांव के युवा बे रोजगार घूम रहे हैं ।
4, किसान कर्जदार हो गया ।
5, जमीन में जीवांशकर्बन लगभग 0,3 प्रतिशत रह गया है जिस जमीन की उर्वरा शक्ति घट गई । यह कार्बन करीब एक प्रतिशत। होना चाहिए़ ।
6, बायोडायवर्सिटी नष्ट ह गई। बहुत सारेजव जंतु विलुप्त हो गए ।
7, भू जल स्तर नीचे चला गया ।
8, किसानों की आत्महत्या बढ़ गई ।
9, भोजन, पानी, सब्जियां तथा फल, पशुओं का चारा तथा दूध आदि वीसाक्त हो गए । जिनमैं कीटनाशकों के अवशेष मिलने लगे ।
10, जलाशय खत्म हो गई।
11, भूमि की संरचना खराब हो गई । जमीन बंजर हो गई।
12, मनो क्रॉपिंग से भोजन सिर्फ 6 फसलों तक ही सीमित रह गया यह फसल है गहूं
चावल, मक्का, गन्ना,सोयाबीन, कॉटन।
13 भोजन की पौष्टिकता खत्म हो गई ।
14 जल ,जमीन ,जंगल, जानवर, एवं जन सभी प्रभावित हुए ।
15, विभिन्नपकार की बीमारियां मनुष्य तथा जानवरों म
आनेलगीं ।
16, मनुष्य महार्मोंस डिसऑर्डर के प्रभाव दिखाईद।
ने लगे ।
17,ज्यादा उत्पादन के बावजूद फसल उत्पादों का विक्रय मूल्य काम मिल रहा।
18, 1 किलो गेहूं से 900ग्राम दलियlगेहूं की कपनियां अथवा व्यापारी सुखी उनकी हैं उनकी आमदनी किसानों से अधिक है जब की किसान गेहूं के एक दाने से 1 किलो अनाज पैदा करता है। और वह कर्जदार है और उसे कई बार आत्महत्या करना पड़ता है ।
19। क्लाइमेट चेंज अथवा मौसा म मै बदलाव , ताप क्रम में बढ़ोतरी, सूखा तथा बाढ़ की समस्या ।
20 नए-नए कीड़े तथा बीमारियों का प्रकोप।
21, कीटों में नासि जीव नाशकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता का विकसित होना।
22 विभिन्न नाशि जीव की संख्या में अचानक वृद्धि हो जना । लाभदायक जीवन की संख्या में कमी आ जाना ।
23, भूमि में जीवाश्म कार्बन की मात्रा तथा सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या में कमी आ जाने की बजय से भूमि की उर्वरा शक्ति मैं कमी आ गई ।
24,भूमि बंजर हो गई।
25, फसल पारिस्थितिक तंत्र में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के लाभदायक जीव जैसे तितलियां,मेंढक, केंचुआ,स्नैक्स, वेलवेट माइट, गिनजय, विभिन्नपकार
की चिड़ियों ,जुगनू , मधुमक्खियां, भौंरा ,मकड़ियां,आदि विलुप्त हो गए ।
26 नौजवानों का गांव से shahron. की तरफ पलायन होने लगा ।
27 , मशीनरी कलर की वजहस बैलों पर आधारित खेती खत्म हो गई ।
28, रसायन ऑन के उपयोग से पैदा होने वाले कृषिउत्पादों मे रसायनों के अवशेष भारी मात्रामे पाए जाने की बजाय से कृषि उत्पादन विषैले हो चुके हैं जिनके खाने से मनुष्य तथा पशुओं में विभिन्न प्रकार की लाइलाज बीमारियां पैदा होने लगी है ।
29 जल ,जमीन, जंगल, जानवर, जैव वविधता,जन, तथा जलवायु बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।
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