जैसा कि मैने पहले यह बताया था कि प्राकृतिक खेती आईपीएम का ही एक सुधरा हुआ रूप है जिसमें रसायनों का उपयोग बिलकुल जिन्हों किया जाता है तथा भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के प्रयासो के साथ जैवविविधता,प्रकृति के संसाधनों तथा जीवन के पंच महाभूतों क्षिति,जल, पावक( अग्नि),गगन(स्काई) समीरा(वायु) का सरक्षण तथा कृषकों की आमदनी अथवा आय को बढ़ाने का भी प्रयाश किया जाता है तथा जल,जमीन ,जंगल,जानवर ,जन ,तथा जमीन मै पाये जानेवाले,माइक्रूर्गनिज्म्स एवं जीवांश कार्बन तथा ह्यूमस का संरक्षण एवं रक्षा की जाती है। इसकेलिय खेतों के चारों तरफ चौड़ी चोंडी मेड तथा मैंड प र र्पेडलागे जातेहै एवं खेतों का समतलीकरण किया जाता है जिससे खेती के लिय आवश्यक तत्व बहकर दूसरे खेट मैं नास जानेपाओं, खेतों मैं जीवाश्म कार्बन, बढ़ाने हेतु जानवरों के मलमूत्र तथा खेतों मैं पायजानेवाले खरपतवारों एवं फसलें अवशेषों का र्खेतों ही आच्छादन किया जाता है। जिससे जमिन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है । इसी प्रकारसे खेतों में सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाने हेतु जीवामृत का प्रयोग किया जाता है।इसी प्रकार से नशीजीवों के नियंत्रण हेतु जन्तुओं तथा वनस्पतियों पर आधारित नशीनीव नाशकों का प्रयोग किया जाता है।
ठीक।ईश प्रकार से फार्माकल्चर भी प्राकृतिक खेती का एक सुधार हुआ रूप है। शब्द परम कल्चर परमानेंट और एग्रीकल्चर के साथ संधी से मिलकर बना है। खेती की इस विचारधारा भी रसायनों का उपयोग बिल्कुल ही नहीं किया जाता है। यह एक प्रकार की प्रकट पर आधारित खेती की एक एम निर्भर तकनीक है जिसमें बाहर से। खाद तथा कीटनाशक डालेबिना जगल के पारिस्थितिक तंत्र पर आधारित इकोसिस्टम की नकल करके इस प्रकार से खेती की। जाती है जिससे पर्यावरण,जैवविवि7,प्राकृतिक
संसाधनों तथा समाज को कोई नुकसान न हो।यह मानव की जरूरतें जैसेभोजन ,पानी अवश्य आदि की पूर्ति करने की एक कृषि एवं जीवन शैली प्रणाली है। परमाक्चर इस नोट अ रॉकेट साइंस बुत ईट इस अ सब्जेक्ट ऑफ कॉमन सेंस।
No comments:
Post a Comment