1, जैविक खेती में ना खर्चा कम होता है ,न उत्पादन बढ़ता है और ना ही परिश्रम कम होता है । इस खेती मैं भी इनपुट्स बाज़ार ही खरीदे जाते हैं जो रासायनिक इनपुट से भी महंगे होते हैं ।
2, ऑर्गेनिक खेती के प्रमुख तीन प्रकार के इनपुट्स होते हैं ।
ये हैं ,1, कंपोस्द खाद ''2, वर्मीकपोस्ट खाद ,,3,, बायो डायनॉमिक्स अर्थात जानवरों के सींगों की खाद ।
इन तीनों प्रकार के इनपुट एस कापयोग करना साधारण तौर परकिसानों के लिए असंभव है तथा महंगा है।
3, केंचुआ के खाद मैं विभिन्न प्रकार के हैवीमेटल पाए जात जो हमारे शरीर में जा करके तरह-तरह की बीमारियांपैदा करते हैं। गोबर की खाद वातावरण का टेंपरेचर जब 40 डिग्री से ऊपर होता है तो कार्बन तथा ऑक्सीजन से रिएक्ट करके कार्बन मोनोऑक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड जैसे उत्पन्न करते हैं जो ग्रीनहाउस गैसेस है जींस वातावरण का टेंपरेचर बढ़ता है इसी को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।
प्राकृतिक खेती
1, यह खेती प्रकृति तथा जंगल के सिद्धांतऑन पर आधारित है। प्रकृति जब जंगल के सभी पेड़ पौधों की भरपूर पूर्ति करती है तो हमारे खेतों की फसलोंके की भी पूर्ति करेगी।
2 प्राकृतिक खेत भूमि मेंपाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों पर आधारित खेती है। जो पतझड़ होने के बाद नमी की उपस्थिति में पौधों के पत्तों को सदा कर ऑर्गेनिक कार्बन में बदलते हैं जो बाद में ह्यूमस मैं बदल जाता है।ह्यूमस ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है। रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से सूक्ष्म जीव खत्मह चुके हैं । अत इनकीसख्या को जमीन मैं बढ़ाना अति आवश्यक है। इसके लिए जमीन में कार्बनिक पदार्थ जैसे जानवरों का मल मूत्र पौधों व फसलों के अवशेष तथा जीवामृत का प्रयोग उसे वक्त करनाचहिए जमीन मैं पर्याप्त मात्रा में नमी हो।
3, हमें रासायनिक खेती के साथ-साथ पारंपरिक खेती की विधियों को नहीं छोड़ना चाहिए था ।
4, सरकार ने 2481 करोड़ रुपए से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की स्थापना की है जिसमें किसानों को गायोंक खरीदने तथा महिला एवं पुरुष किसने को प्रशिक्षित करने तथा गायों की नसों को सधारने पर जोर दियाजाएगा।
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