Thursday, April 23, 2026

IPM in terms of the farmers. किसानों के विचार से आईपीएम क्या है?

विभिन्न प्रकार की संस्थाओं, वैज्ञानिकों, बुद्धिजीवीयो, तथा प्रगतिशील किसानों,ने  आई पी,एम   की विभिन्न पकार की परिभाषाएं दी हैं ।यहां तक मैंने भी आई पी एम की 20-25 परिभाषाएं दी है। परंतु जैसा कि मैंने पहले बताया की आईपीएम जीवन के प्रत्येक मुद्दे से संबंधित खेती करने की तथा वनस्पति संरक्षण करने की एक विचारधारा  है। आई पी एम  नासिजीव प्रबंधन सहित संपूर्ण कृषि तंत्र अथवा पद्धति कै समेकित प्रबंधन की एक विचारधारा है । आई पी एम जहां  एक तरफ किसानों की जीविका  संचालन से  जुड़ी हुई है वहीं यह अन्य सभी लोगों तथा पशुओं  ,सूक्ष्म जीवों, पक्षियों  आदि की खाद्यसुरक्षा को भी सुनिश्चित करने  में अपना महत्व पूर्ण योगदान देती है। खाने के योग्य सुरक्षित कृषि उत्पादों का कम से कम  खर्चे में अधिक से अधिक उत्पादन,और उनका बाजार से अधिक से अधिक विक्रय मूल्य प्राप्त करना किसानों का खेती करने का मुख्य उद्देश्य होता है। इसके लिए किसान भाई विभिन्न प्रकार की विधियों। प्रयोग करते हैं जिसमें रासायनिक विधियां भी शामिल होती हैं।परंतु खाने के योग्य सुरक्षित भोजन के उत्पादन के लिए 
रासायनिक विधियों का उपयोग अंतिम विकल्प के रूप मैं  किसी आपातकालीन परिस्थिति के निदानहेतु ही किया जाता है।।कृषि उत्पादों का उत्पादन भूमि की उर्वरा शक्ति एवं जमीन मै  पाय जानेवाले जीवांश कार्बन , सूक्ष्मजीवों जीवों,एवं उनसे निर्मित   ह्यूमस से होती है अथवा निर्भर करती है। अतः जीवांश कार्बन   की अधिकता बनाए रखने के लिए जमीन मैं कार्बनिक पदार्थ जैसे जानवरों का मल मूत्र , पौधों तथा फसलों के अवशेषों को तथा जमीन मैं सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या को बढ़ाने के लिए जीवामृत  तथा घन जीवामृत  को जमीन मैं फसलों की बुवाई से पूर्व पलेवा के समय खेतों में डालते हैं। खेतों के चारों तरफ मेड बनाते हैं तथा मेड पर विभिन्न प्रकार के पेड़ भी लगते हैं जाे चिडियों के बैठकों का  काम करते हैं तथा विभिन्न प्रकार के नशीजीवों का प्रबंधन करते हैं। मेडेन एक खेत  का जीवांश कार्बन , मिट्टी और पानी दूसरे खेत मैं रोकने के लिए सहायक होती हैं। खरपतवारों की  ऊंचाई अगर फसल से ऊपर होजनेवपर उनको वहीं खेत में ही दबा देना चाहिय।
आजकल का आईपीएम / खेती बाजार  तथा रसायनों पर आधारित है यद्यपि यह आईपीएम केसद्धांतों के विपरीत है। खेती के सारे इनपुट बाजारों से खरीदे जाते हैं जिससे उत्पादन की कीमत  बढ़ जाती है । कृषि उत्पादन की कीमत
को कम करना खेती का प्रमुख कार्य  है । इसके लिए खेती के इनपुट्स को बाजारों से ना खरीदा जए बअली किसानों के घर  पर ही बनाएंगे। जिससे किसानों की कृषि उत्पादों की लागत कम होगी तथा किसानों आमदनी बढ़ेगी। कृषि उत्पादों के उत्पादन के अलावा उनकी पैकेजिंग ,वैल्यूएडशन, प्रमाणीकरण,तथा विपणन संबंधी गति विधियों को भी आई पी एम मैं शामिल करना चाहिए़।
IPM is the Sangam / merger  or Triveni   of three rivers or schemes of Dte. Of Plant Protection, Quarantine and Storage commenced from 1991-92., These are Biological control,or Ganga ,Pest Surveillance ,or Yamuna and  Plant Protection or Sataswati in which now Plant Protection / Sarswati is  invisible. This  Triveni  is  .spreading or dissiminating   the messege of IPM  among its all stakeholders  to grow / protect the plants / Crops  and Agricultural commodities / crops  with minimum expenditure, minimum use of  chemicals or  without use of chemicals and with least disurbance to life,nature  Environment and society through adoption of all available, affordable and feasible methods of pest management in compatible manners  to suppress the pest population below ETL..
I will remain obliged of IPM Scheme for providing bread and butter to  me as wellas to my children  throughout my life. Now according to my own idea IPM has now become the thought of the integration of   all the schemes of Dte Of P,PQ and S with a concept  or theme of ensuring food Security along with food safety, environment and ecological safety.

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