Locust control operation is like a war with same requirements.An integrated approach including administrative,technical,extension,mechanical and unskilled labourers are deployed for locust co trol Operationby LW Oin Indian scheduled Desert Area.of Raj,Guj,Part of Haryana and Punjab states.Advance planning,,preparation and proper and expert deployment of the resources regular supply if essential inputs at affected area a strong and encouraged leadership,good communication skills,properjudgement and analysis of the situation,wick decision making,working in team sprit in adverse inhospitable desert conditions and always be motivated in adverse conditions,Onspot and quick repaire of breakdown vehicles,ensuring supply of e.required equipments ,helping attitudes with colleagues, co ordination with national and international agencies,monitoring of locust situation both at national and international level are the main mantras of management of locust control Operations.
Saturday, May 30, 2020
Management of Locust Control Operation in Indian Scheduled Desert Area.
This year 2020 ,is called as the year of tripled natural Disasters.Corona pandemic,,Locust invasion and Sea storm in Way of Begal affected the Indial economy and lives .Locust and Corona problems invaded in India from various countries and created emergency situation in form of total lockdown of the country and damage to the Agricultural crops right from Rajasthan to Maharastra.Sea storm has also done serious or huge loss of properties and crops.
Let's Strengthen ,Equipped and Update the locust Warning Organisation (LWO) to combat the locust emergency.
1.Locust warning Organisation must always be kept ready with all control potential to combate the locust menace.
2.All the vacant posts must always be kept filled up .
3.Mouck up operations and trainings must be given not only to the locust staff regularly but also to the staff members of other schemes of the Dte.of Plant protection ,quarantine and Storage so that they can be deployed for locust control operation work at the time of locust emergency.
4.If possible the postings of local staff may be made in LW O who are well aware about the local routes of border areas because the deployment of control potential including pesticides ,and other locust control equipments is required to be done only during night hour and the air sorter ground spray is done only during very early morning hours before the sun rises as just after sun rises the locusts starts flying .After flying the locust it isnot possible to control locust. Locust is chased during evening hours to findout the location of settling thr locust swarms .5. Regular monitoring of locust population both at national and international level may be done to findout the possibility of locust invasions or local breeding.
6.Liaisioning with all the national and international agencies.
7.
Preparation of Contingency plan and obtaining all relevant approvals and sactions in advance every year before obsetsof locust season.
8.procurement of pesticides and equipment in advance.
9.
Thursday, May 28, 2020
भारत में टिड्डी आपातकाल जारी है------भाग 2
भारत में टिड्डी आक्रमण संबंधी जानकारी एवं अनुभव: - मैंने फरवरी 1978 में भारत सरकार के वनस्पति संरक्षण, संगrodh एवं संग्रह निदेशालय मैं पदभार ग्रहण किया था l इसी साल भारत में टिड्डी के आक्रमण हुआ था l इससे पूर्व हुए टिड्डी के आक्रमणों की जानकारी रिपोर्टों के आधार पर ली जा सकती है l सन 1986 मैं भी टिडियो का आक्रमण हुआ था परंतु टिड्डी का सबसे बड़ा आक्रमण सन 1993 में हुआ था उस वक्त यह आक्रमण मध्य प्रदेश राज्य तक पहुंच गया था l 2005 में locusts का आक्रमण भारतीय अनुसूचित रेगिस्तानी क्षेत्र के भारत पाक सीमा से लगे हुए जैसलमेर व बाड़मेर तथा बीकानेर जिलों में हुआ था l जिनको माइक्रो नायर मशीनों की मदद से इसी क्षेत्र में नियंत्रित कर लिया गया था l और फसली एरिया में नहीं जाने दिया गया था l सन 2006 में माइग्रेटरी लोकस्ट का इनवेजन भारत चीन सीमा से लगे Jammu Kashmir ke a Ladakh क्षेत्र के cold desert के जंस्कार (Distt Kargil एवChalthang (Distt Leh) घाटियों में हुआ था जिनको माइक्रो एल्बl नामक spray machines से नियंत्रित कर लिया गया था l टीटी नियंत्रण अभियान का संचालन एवं प्रबंधन हमारी देखरेख में हुआ था l cold desert यानी ठंडे मरुस्थल में locust control Abhiyan का यह पहला अनुभव था lइससे पहले ठंडे मरुस्थल में कभी भी लोकस्ट या टेडी नियंत्रण अभियान नहीं चलाया गया था l
सोशल मीडिया से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह जानकारी प्राप्त हुई कि वर्ष 1919 में locusts का आक्रमण भी indo-pak बॉर्डर के पास हुआ था l उस समय भी यह पता चला था कि locusts का प्रवेश indo-pak बॉर्डर से हुआ है परंतु इसके साथ-साथ यह भी अनुमान लगाया जा सकता है हो सकता है यह आक्रमण locust की local breeding के द्वारा भी हुआ इसकी पुष्टि सिर्फ लोकस्ट वार्निंग ऑर्गेनाइजेशन के अधिकारियों से ही की जा सकती है lयह देखा गया है कि 20019 मैं हुआ यह locusts का आक्रमण दिसंबर 2019 तक सक्रिय रहा l
लोकस्ट के आक्रमण की जानकारी के लिए यह बहुत जरूरी है की लोकस्ट की मॉनिटरिंग राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रेगुलरली की जाए l हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकस्ट की मॉनिटरिंग Food and Agricultural Organisation (FAO)के द्वारा की जाती है और उनसे मॉनिटर की गई लोकस्ट सिचुएशन को locist situation बुलेटिन के रूप में सभी सदस्य देशों को भेज दी जाती हैl Directorate of plant protection, Quarantine and storage को इस प्रकार की जानकारी लोकस सिचुएशन बुलिटिन के के रूप में एफ ए ओ द्वारा दी जाती है l
भारत व पाकिस्तान में locusts के ग्रीष्मकालीन प्रजनन क्षेत्र पाए जाते हैं परंतु अफ्रीकन कंट्रीज में रेड सी के चारों तरफ locusts के शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन दोनों प्रजनन क्षेत्र पाए जाते हैं l जिससे इन क्षेत्रों में लोकस्ट पूरे साल मौजूद रहती है और अगर अनुकूल मौसम मिलता है तो इनकी प्रजनन बहुत तेजी से होता है तथा यह swarm या झुंड बनाकर दूसरे क्षेत्रों में तथा दूसरे देशों में प्रवेश करने लगते हैं lभारत में locusts के प्रवेश करने के मुख्य रूप से दो रास्ते हैं एक तो locusts सऊदीअरबिया ,ईरान ,अफगानिस्तान ,एवं पाकिस्तान के रास्ते Indoपाकिस्तान के पश्चिमी इलाके जैसे कि जैसलमेर व बाड़मेर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों से प्रवेश करती हैं l दूसरा यह रेड समुद्र को सीधे उड़कर गुजरात के कच्छ भुज एरिया में आ सकते हैं l इतनी लंबी उड़ान के दौरान यह लोकस्ट समुद्र में भी सेटल करती है और कुछ लोकस्ट समुद्र में डूबी जाती है l तथा बाकी बची हुई लोकस्ट उड़कर करके समुद्र पार करके गुजरात के कच्छ भुज एरिया से प्रवेश करती है l परंतु प्राप्त सूचनाओं के अनुसार इस वर्ष 2020 में जो लोकस्ट के दल आए हैं वह इंडो पाक सीमा के जैसलमेर तथा बाड़मेर सीमावर्ती इलाकों से प्रवेश करके आए हैंl इन locusts के प्रवेश मैं हवा के दिशा का बहुत बड़ा योगदान होता है इसी तकनीकी कारण के वजह से पाकिस्तान locustsके आक्रमण के रोकथाम के लिए विशेष प्रयत्न नहीं करता है l क्योंकि गर्मियों के समय हवा का रुख भारत की तरफ होता है और locusts इसकी वजह से भारत की तरफ बढ़ती हैं इसलिए पाकिस्तान अपनी तरफ से बहुत कम प्रयास करता है इनके नियंत्रण के लिए l सर्दी मैं दिसंबर के आसपास हवा का रुख बदलता है और यह locusts वापसी इसी रास्ते से घूमती हुई अफ्रीकन कंट्रीज में पहुंच जाती हैं lरास्ते यह locustsअपना पड़ाव डालती हुई वापस चली जाती हैl यह locusts के भारत में प्रवेश के दो रास्ते हैंl.
इसके अलावा यह भी अनुमान लगाया जा सकता है की इंडो पाक सीमा से लोकस्ट इंवर्जन होने के अलावा कुछ जगहों पर शेड्यूल रिजल्ट एरिया में locusts की लोकल ब्रीडिंग भी हुई हो क्योंकि इस वर्ष भी राजस्थान के कुछ सीमावर्ती भागों में तथा अन्य स्थानों में हल्की-फुल्की बरसात हुई थी जिससे scheduled Desert Area पर्याप्त नमी रहने की संभावना थी इसके अतिरिक्त आजकल जो इंदिरा गांधी कैनाल निकली है उसके आसपास भी soil moisture लोकस्ट के प्रजनन के लिए अनुकूल रहता है l
अभी प्राप्त सूचनाओं के अनुसार इस साल 2020 में locust के झुंड राजस्थान से उत्तर प्रदेश ,पंजाब ,हरियाणा ,के कुछ भाग ,मध्य प्रदेश महाराष्ट्र ,तथा आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ कर पहुंच गए हैं जिससे मौजूदा सीजन में लगी हुई सब्जियां व अन्य फसलों तथा महाराष्ट्र में पाए जाने वाले फ्रूट जैसे अंगूर ,केला, संतरा आदि को भारी नुकसान हो सकता है lअनुसूचित रेगिस्तानी क्षेत्र Scheduled Desert Area मैं locust कंट्रोल की जिम्मेदारी लोकस्ट वार्निंग ऑर्गेनाइजेशन की होती है परंतु फसली एरिया में यह जिम्मेदारी राज्य सरकार के विभागों की होती है l अतः सभी राज्य सरकारों को अपने स्तर पर अपने संबंधित विभागों को सतर्क करते हुए लोकस्ट कंट्रोल के लिए उचित कदम उठाने के लिए सख्त निर्देश दे देनी चाहिए और जितनी शीघ्र से शीघ्र हो लोकस्ट को आगे से कंट्रोल करना चाहिए l
मानसून सीजन के प्रारंभ में तथा इसके दौरान उपयुक्त नमी होने की वजह से लोकस्ट के प्रजनन हेतु उपयुक्त परिस्थितियों पनपने की वजह से इस दौरान locust आक्रमण के बढ़ने की पूरी की पूरी पूरी संभावना है अतः सरकार को लोकस्ट कंट्रोल ऑपरेशन के मैनेजमेंट के लिए वांछित सभी कंट्रोल पोटेंशियल को हमेशा तैयार रखना चाहिए के साथ-साथ लोकस्ट वार्निंग ऑर्गेनाइजेशन मैं खाली पड़े हुए पदों पर तुरंत ही नियुक्तियां कर देनी चाहिए l निदेशालय की विभिन्न स्कीम्स में कार्य कर रहे स्टाफ को समय-समय पर locust control हेतु प्रशिक्षण देने की योजना भी बनानी चाहिए और उनको उसको क्रियान्वयन करना चाहिए l हमारे देश पर locust का खतरा हमेशा बना रहता है इसके लिए हमारे लोकस्ट स्टाफ को कंट्रोल पोटेंशियल सहित 24 घंटे तैयारी की हालत में रहना चाहिए जिस प्रकार से हमारे देश के सेना के जवान तैयार रहते हैं l locust warning organisation एक प्रकार का पैरामिलिट्री ऑर्गनाइजेशन या संगठन है जिसको खतरे से निपटने के लिए 24 घंटे तैयार रहना पड़ता हैl
Wednesday, May 27, 2020
लोकस्ट इमरजेंसी is ऑन इन इंडिया भारत में लोकस्ट आपत्ति कालचल रहा है ---- प्रथम भाग
मानवी गतिविधियों एवं प्राकृतिक परिस्थितियों के द्वारा अचानक बहुत बड़े या विस्तृत क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली घटना या परिस्थिति जिससे जीवन ,आर्थिक ,प्राकृतिक ,सामाजिक ,पारिस्थितिक तंत्रों , सामुदायिक स्वास्थ्य ,प्राकृतिक संसाधनों ,पर्यावरण ,जैव विविधता ,आदि को अधिक से अधिक नुकसान होता है आपत्ति काल कहलाता है यह आपत्ति काल अचानक उत्पन्न होता है और कभी भी प्रायर इंटीमेशन या पूर्व सूचना को देकर नहीं आता है l अतः किसी आपत्ति काल से निपटने के लिए हमें पहले से ही तैयारी रखनी पड़ती है या जो संसाधन हमारे पास उपलब्ध होते हैं उन्हीं संसाधनों से उस आपत्ति काल का निपटान किया जाता है
दोस्तों लोकस्ट या टिड्डी यह एक प्रकार का माइग्रेटरी ग्रास हॉपर है जो एक प्रकार का अंतरराष्ट्रीय नासि जीव है l वैसे तो टिड्डी की बहुत सारी प्रजातियां पाई जाती है परंतु रेगिस्तानी टिड्डी या डेजर्ट लोकस्ट एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हानिकारक कीट है lयह विश्व के बहुत सारे महाद्वीपों में इतना नुकसान करता है l जहां इसका आक्रमण होता है वहां पर दुर्भिक्ष अथवा अकाल तक उत्पन्न हो जाता है l
इसका कारण इसकी झुंड में या समूहों में चलने की प्रवृत्ति जिसमें प्रत्येक झुंड में लाखों की तादात में locusts का होना हैं तथा दूसरा कारण बहुत मात्रा में खाने की प्र बत्ती अथवा आदत l किसी देश में बाहर से टिड्डी यो के समूह को किसी देश के अंदर आने को लोकस्ट इनवेजन कहते हैंl तथा टिड्डी यो के समूह को swarms कहते हैं l तथा जितनी अवधि तक इन टिड्डी यो का प्रकोप किसी भूभाग या किसी देश में जब तक रहता है तब तक इस अवधि को लोकस्ट आपत्ति काल या लोकस्ट इमरजेंसी पीरियड भी कहा जाता है l टिड्डी एक प्रकार की प्राकृतिक आपदा है जो वैश्विक स्तर का नासिजीव है l यह एक प्रकार का अनप्रिडिक्टेबल नासिजीव है जो एक तरह से सोते हुए राक्षस की तरह होता है lऔर कभी भी किसी वक्त यह उभर कर आ सकता है तथा फसलों को अपेक्षा से अधिक हानि पहुंचा सकता है l यह एक प्रकार का बहु भक्ति जीव है जो कि हर प्रकार की वनस्पतियों को भुक्कड़ की तरह खाता है अर्थात इसके खाने की गति बहुत ही तीव्र होती है l
इस वर्ष 2020 मैं देश ने तीन प्रकार के प्राकृतिक आपत्ति काल झेले हैं l यह आपत्ति काल है कोरोना जैसी बीमारी या महामारी का प्रकोप ,अफ्रीकी देशों तथा अन्य देशों जैसे सोमालिया ,इथोपिया, ईरान, अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश किए गए locusts के समूह के द्वारा होने वाली महामारी या आपत्ति काल तथा बंगाल की खाड़ी में आया हुआ Amphan नाम का समुद्री तूफान l locusts तथा Corona जैसी महामारी ओं का प्रकोप बाहरी देशों से आने से हुआ l इस समय देश में लोकस्ट इमरजेंसी या आपत्ति काल चल रहा है l जिस से निपटने के लिए देश के सामने सबसे पहली प्राथमिकता है जिससे देश की खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित रखा जा सके l
टिड्डी नियंत्रण अभियान एक प्रकार का युद्ध की तरह अभियान होता है जिसमें युद्ध की तरह ही सभी संसाधन सामग्री ,साधन सामग्री, ट्रांसपोर्ट सिस्टम ,कम्युनिकेशन सिस्टम ,control equipment ,नियंत्रण करने वालेेेेे कीटनाशक Malathion98 ^ULV ,Chlorepyriphos 20 EC ,GPS system RAMSES,Miconair Sprayers,Ulvamast and micro Ulva ,Ulvamast , a fleet of vehicles,Camping equipment, Firstaid equipment,protectivpersonal Equipment etc.
आवश्यक होते हैं l टिड्डी नियंत्रण अभियान के प्रबंधन हेतु अग्रिम योजना बनाना ,संसाधनों को नियत स्थान पर अभियान के शुरू करने से पहले पहुंचाना अति आवश्यक होता है lभारत के अनुसूचित रेगिस्तानी क्षेत्र जो लगभग 200000 स्क्वायर किलोमीटर मैं राजस्थान ,गुजरात तथा हरियाणा आदि राज्यों में फैला हुआ है l राजस्थानी क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण एवं टिड्डी चेतावनी की जिम्मेदारी टिड्डी चेतावनी संगठन जो कि भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण संगरोवं और संग्रह निदेशालय फरीदाबाद के अंतर्गत है की है l परंतु फसली एरिया में टिड्डी नियंत्रण की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों के विभागों की होती है lलोकस्ट या टिड्डी एक प्रकार का वैश्विक ना सजीव होने की वजह से वैश्विक स्तर से लोकस्ट कंट्रोल या टीडी नियंत्रण के सभी गतिविधियां फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा संचालित की जाती हैl
लोकस्ट के विभिन्न life स्टेज के नियंत्रण हेतु विभिन्न प्रकार की रणनीतियां अपनाई जाती हैl जैसे कि locust के हार्पर के नियंत्रण हेतु कीटनाशकों का ग्राउंड स्प्रे अथवा डस्टिंग करके किया जाता है तथा एडल्ट जिसकी भी कई स्टेज होती है जैसे की पीली टी डी व गुलाबी टीडी पर छिड़काव बड़ी-बड़ी स्पीयर्स द्वारा locusts को उड़ने से पहले सुबह प्रातकाल किया जाता है किया जाता है l सुबह सूर्य निकलने से पहले टिड्डी के ऊपर किसी भी तरह के छिड़काव व डस्टिंग ऑपरेशन को क्रियान्वयन कर लेना चाहिए l सूरज निकलने के बाद locusts की उड़ान शुरू हो जाती है l फिर उनके ऊपर छिड़काव या बुर्का नहीं किया जा सकता है l शाम के टाइम या शाम के वक्त हमें locusts का पीछा करके उनके द्वारा डाले गए पड़ाव वाले स्थान की सही जानकारी ले लेनी चाहिए और रात को ही वहां पर सभी सामग्री, संसाधन जो कि locust control नियंत्रण के लिए आवश्यक हैं उस स्थान तक पहुंचा देना चाहिए तथा सुबह सूर्य निकलने से पहले टिड्डी नियंत्रण के लिए छिड़काव अथवा बोरगांव कर देना चाहिए l
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