1,Traditional Farming. पारंपरिक खेती:-
यह एक प्रकार की कृषिपदति है जो सदियों से चली आ रही है जब हमारे देश के पास सिंचाई के साधन रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक, हाइब्रिड सीड्स,, तथा आधुनिक कृषि यंत्र नहीं होते थे तथा खेती पूर्ण रूप से मानव श्रम, पशु शक्ति, प्राकृतिक वर्षा, तथा पशुओं के मल मूत्र पर आधारित उर्वरक उर्वरकों, आदि पर आधारित होती थी। इसमें देसी बीज प्रयोग किए जाते थे । यह खेती परिवार के सदस्यों के द्वारा तथा पुराने तरीके के कृषि यंत्रों का प्रयोग कर के की जाती थी । इस प्रकार की खेती में जमीन के अंदर जीवाश्म कार्बन भरपूरमत्रा में होता था । इस प्रकार की खेती मैं स्थानीय बीजों का प्रयोग किया जाता था। यह खेतीजीवन निर्वाह के लिए की जाती थी। जो पूर्ण रूप से वर्षा परआधरित होती थी।
2,रासायनिक खेती:-यह कृषि की एक ऐसी पद्धति है जिसमें फसलों की पैदावार तेजी से बढ़ाने के लिए तथा उन्हें कीटों आदि से बचाने के लिया कृतिम रसायनों ,रासायनिक उर्वरको,कीटनाशकों ,तथा खरपतवार नाशकों का भारी मात्रा में उपयोग कियाजत है।
3,एकीकृत नाशिजीव प्रबंधन पर प्राधारित खेती:-
इस प्रकार की खेती मैं कम से कम खर्चे में, फसल उत्पादन एवं नासि जीव प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, ऑर्गेनिक खेती, इकोफार्मिंग , तथा परमा कल्चर आदि की विभिन्न विधियों एवं गतिविधियों को समेकित रूप से प्रयोग करके फसल पारिस्थितिक तंत्र में पाए जानेवाले नाशिजीवों की संख्या को आर्थिक हानी स्टार के नीचे सीमित रखा जाता है। इस प्रकार की खेती मैं रसायनों का उपयोग सिर्फ किसी आपातकाल स्थिति के निपटान हेतु अंतिम विकल्प के रूप मैं इस प्रकार से किया जाता है कि जीवन, प्रकृति ,पर्यावरण, और समाज के क्रियाकलाप बाधित ना हो और गुणवत्तायुक्त कृषि उत्पादों का भरपूर उत्पादन के साथ अधिक से अधिक विक्रय मूल्य प्राप्त हो सके।
4 जैविक खेती अथवा ऑर्गेनिक खेती:- बिना रसायनों के की जानेवाली खेती को ऑर्गेनिक खेती कहते हैं।इसप्रकारकी खेती में जैविक उर्वरक,जैविक कीटनाशक,जैविक खाद जैसे हरी खाद केंचुआ खाद ,या तो घर पर बनाकर या बाजार से खरीदकर प्रयोग की जाती है।इस प्रकार की खेती में रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता है।इसमें भी स्थानीय इनपुट का प्रयोग किया जाता है। इस खेती मैं जेनेटिकली मोडिफाइड सीड्स का भी प्रयोग नहीं किया जाता है।
5,Biodynemic kheti :खेत को जिंदसमझा जाएगा,स्वस्थ मृदा उत्पन्न करें,मानवता का पोषण करे ,प्रकृति के बहाव मैं चलती है,नक्षत्रों की गति पर चलती है।
6,नेचुरल फार्मिंग:पराकृतिक खेती
Local ecosystem ke tahad sabhi components shamil karein .
Tree,crops,animals biodiversity,ko samil karte huy kheti karain,No tillage.
Natural farming is an improved version of IPM in which no chemical is used and farming is done by improving the fertility of soil, conserving Natural resources and conserving Natural resources and Panch mahabhootas of life.
7,Ecofarming :- Treat the soilnot the plant.Enhance the population of microorganisms.It is the combination of modern and traditional practices /approaches.
8,Permaculture:- It is also Traditional and modern approach.
9,Zero budget Naturally Farming:- By Subhash Paaleker.
, किसी भी इनपुट की कीमत नहीं लगानी है । सभी इनपुट्स को किसानों के खेतों पर ही तैयार करना है। छोटे किसानों के लिय यह सबसे अच्छी खेती है। इसमें कोई भी रसायन तथा GMOS प्रयोग नहीं किए जाते हैं। बीज और खाद घर पर ही बनाएं जाते हैं।